o रायपुर: बस्तर में बढ़ेगा तिलहनी फसलों का रकबा
o कम लागत, अधिक मुनाफा और फसल विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा
o प्राकृतिक परागण बढ़ने से धान उत्पादन को भी होगा लाभ
रायपुर। बस्तर जिले में किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने की दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। खरीफ सीजन में जिले के विभिन्न विकासखंडों में 225 एकड़ क्षेत्र में रामतिल (नाइजर) और तिल (सेसमे) के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य मक्का जैसी पारंपरिक फसलों के विकल्प के रूप में कम लागत और अधिक लाभ देने वाली तिलहनी फसलों को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।
’200 एकड़ में रामतिल, 25 एकड़ में तिल का प्रदर्शन’
कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा तैयार कार्ययोजना के अनुसार बस्तानार, बस्तर, दरभा तथा चित्रकोट के गुरिया क्षेत्र में कुल 200 एकड़ में रामतिल का प्रदर्शन किया जाएगा। इस कार्यक्रम से लगभग 100 से 200 प्रगतिशील किसानों को जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक किसान को न्यूनतम एक एकड़ और अधिकतम दो एकड़ क्षेत्र के लिए उन्नत किस्म के बीज तथा आधुनिक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। अगस्त माह में बुआई प्रस्तावित है और इसके लिए किसानों का चयन अंतिम चरण में है। इसी प्रकार तोकापाल और बस्तर विकासखंड में 25 एकड़ क्षेत्र में तिल का प्रदर्शन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में 15 से 25 किसानों को शामिल किया गया है तथा अधिकांश क्षेत्रों में बुआई की प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी है।
’कम लागत में बेहतर उत्पादन का विकल्प’
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह कार्यक्रम शासन की फसल विविधीकरण नीति के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। रामतिल और तिल ऐसी तिलहनी फसलें हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है तथा कीट एवं रोगों का प्रकोप भी बहुत कम देखने को मिलता है। इससे किसानों की उत्पादन लागत घटती है और उन्हें अधिक शुद्ध लाभ प्राप्त होता है।
’रामतिल से बढ़ेगा प्राकृतिक परागण, धान उत्पादन को भी मिलेगा लाभ’
विशेषज्ञों का मानना है कि, रामतिल के आकर्षक पीले फूल बड़ी संख्या में मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं। धान में फूल आने के समय मधुमक्खियों की सक्रियता बढ़ने से प्राकृतिक परागण बेहतर होता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव आसपास के धान के खेतों की उत्पादकता पर भी पड़ता है। इस प्रकार रामतिल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि कृषि पारिस्थितिकी को भी मजबूत बनाता है।
’बदल रहा है बस्तर का कृषि परिदृश्य’
खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और बाजार में बेहतर मूल्य को देखते हुए बस्तर के किसानों का रुझान एक बार फिर तिलहनी फसलों की ओर बढ़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र की यह पहल किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने, लागत कम करने और आय बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी। उम्मीद है कि, आने वाले वर्षों में बस्तर में तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ेगा और जिले में टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि का नया मॉडल विकसित होगा।
