नई दिल्ली। नीति आयोग ने शांति अधिनियम 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की। बैठक में सरकार, उद्योग जगत, शोध संस्थानों और नीति विशेषज्ञों ने कानून को मजबूत और व्यावहारिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक का मुख्य फोकस तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहा। पहले सत्र में कानूनी और नियामकीय ढांचे पर चर्चा की गई, जिसमें ड्राफ्ट नियमों, अनुपालन प्रक्रिया और विदेशी निवेश से जुड़े प्रावधानों पर विचार हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि निवेश को बढ़ावा देने के साथ देश के रणनीतिक हितों की सुरक्षा भी जरूरी है।
दूसरे सत्र में वित्त, बीमा और जनविश्वास से जुड़े मुद्दों पर मंथन किया गया। इसमें परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बेहतर बीमा व्यवस्था और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई। तीसरे सत्र में घरेलू विनिर्माण, परियोजना संचालन और कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने मजबूत सप्लाई चेन और क्षमता निर्माण की जरूरत बताई। नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का उद्देश्य भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। शांति अधिनियम 2025 के जरिए 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को गति देने की योजना है।
