भागलपुर। आम खाने के बाद बेकार समझी जाने वाली गुठली अब कई उपयोगी उत्पादों का स्रोत बन सकती है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के वैज्ञानिकों ने आम की गुठलियों से पाउडर और बटर ऑयल तैयार करने की नई तकनीक विकसित की है। इस खोज से कृषि अपशिष्ट के बेहतर इस्तेमाल के साथ नए उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया में ‘रिफ्रैक्टेंस विंडो ड्राइंग’ और ‘कोल्ड-प्रेस एक्सट्रैक्शन’ जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है। इसके जरिए गुठली के अंदर मौजूद पोषक तत्वों को सुरक्षित रखते हुए उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, आम की गुठली में मौजूद गिरी में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल खाद्य उद्योग, कॉस्मेटिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में किया जा सकता है। आम के गूदे से उत्पाद बनाने के बाद बचने वाली बड़ी मात्रा में गुठलियों का अब बेहतर उपयोग संभव होगा।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि, यह पहल किसानों और उद्यमियों के लिए आय के नए अवसर पैदा कर सकती है। साथ ही इससे पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ वेस्ट मैनेजमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। BAU सबौर की योजना इस तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने की है, ताकि आम की गुठलियों को कचरे से बदलकर उपयोगी संसाधन बनाया जा सके।
