गुमला। झारखंड के गुमला जिले के घाघरा प्रखंड में स्थित हापामुनी महामाया मंदिर को राज्य की सबसे प्राचीन और रहस्यमयी धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। लगभग 1100 वर्ष पुराना यह मंदिर नागवंशी काल की महत्वपूर्ण धरोहर है, जो लोहरदगा मार्ग के पास घने जंगलों और शांत वातावरण के बीच स्थित है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां महामाया के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 908 ईस्वी में नागवंशी शासक गजघंट राय ने कराया था। बाद में 1391 ईस्वी में राजा मोहन राय के पुत्र राजा शिवदास ने परिसर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करवाई। मंदिर में रामनवमी के बाद मंडा पूजा का भव्य आयोजन होता है, जिसमें आस्था का अनोखा प्रदर्शन देखने को मिलता है।
यह स्थान अपनी रहस्यमयी मान्यताओं के लिए भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि, मां महामाया की मूर्ति को सीधे देखना वर्जित है, इसलिए पुजारी भी आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा-अर्चना करते हैं। इस परंपरा को लेकर लोकविश्वास आज भी गहराई से जुड़ा हुआ है। मंदिर का संबंध लरका आंदोलन की ऐतिहासिक घटनाओं से भी जोड़ा जाता है। स्थानीय कथाओं के अनुसार, राधो राम और बरजू राम जैसे वीरों ने मां की प्रेरणा से आक्रमणकारियों का सामना किया और यहां उनकी समाधियां आज भी मौजूद हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जाता है।
