तेहरान। होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कार्गो जहाज पर ड्रोन हमले के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि ईरान की ओर से इस आरोप पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने 11 हजार से अधिक फंसे नाविकों को निकालने के लिए चलाए जा रहे निकासी अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया है। IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने बताया कि गुरुवार को जिस मालवाहक जहाज पर हमला हुआ, वह संगठन की आधिकारिक निकासी योजना का हिस्सा नहीं था। उन्होंने कहा कि यह जहाज फंसे हुए नाविकों को लेकर नहीं जा रहा था, लेकिन घटना के बाद सुरक्षा कारणों से पूरे अभियान की समीक्षा की जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र, ओमान और कई सदस्य देशों के सहयोग से पिछले कुछ दिनों से फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चलाया जा रहा था। इस अभियान का उद्देश्य युद्ध और सुरक्षा कारणों से लंबे समय से फंसे जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकालना था। इसी दौरान ओमान के तट के पास सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो जहाज एवर लवली पर ड्रोन हमला हुआ। हालांकि इस हमले में किसी नाविक की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। घटना के बाद IMO ने सुरक्षा कारणों से निकासी अभियान को फिलहाल रोकने का फैसला लिया।
महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने कहा कि जब तक निकासी सूची में शामिल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक अभियान आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, इस पूरे क्षेत्र में करीब 20 हजार नाविक विभिन्न जहाजों पर फंसे हुए हैं। इनमें से लगभग 11 हजार नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष निकासी योजना तैयार की गई थी। वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि हाल के दिनों में उन्होंने कई ईरानी ड्रोन मार गिराए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
