पखांजूर। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने केंद्र से लेकर राज्य सरकार एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। वहीं दूसरी ओर स्कूल शिक्षा विभाग की अनदेखी से सरकारी स्कूलों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। सरकार शिक्षा को बेहतर बनाने काफी प्रयास कर रही है, लेकिन ये सब कागजों तक ही सीमित है. जमीनी स्तर पर हकीकत ये है कि आदिवासी अंचलों में स्कूलों की हालत बदहाल है। 40 साल पुराना भवन जर्जर हो चुका है। और बच्चे पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर है.
स्कूल भवन की यह दयनीय स्थिति ग्राम पंचायत जबेली के आश्रित गांव टेकामेटा की है। स्कूल में कक्षा पहली से पांचवी तक की कक्षाएं संचालित होती है, जिसमें 27 बच्चे रजिस्टर में दर्ज हैं। 1980 में निर्मित यह भवन 40 साल पुरानी है। स्कूल की हालत ऐसा है कि भवन कभी भी गिर सकती है।
भवन गिरने की आशंका से भयभीत-पालक
अभी कोरोना काल के बीच शिक्षकों को मोहल्ला क्लास लेकर बच्चों को पढ़ाने के आदेश है, जिसके चलते बच्चे को शिक्षक पेड़ के छाव में पड़ा रहे है, लेकिन इससे पहले भवन गिरने के भय के बीच बच्चे पढ़ाई करते नजर आते थे. भवन बांस, बल्ली व टाली वाले कच्चे छत है. जिसमें बारिश होने पर कमरों में पानी टपकता है. दीवारों से प्लास्टर भी उखड़ने लगे है।
टेकामेटा के ग्रामीण सुकलाल खालको, नाथूराम दुग्गा, मन्नू उसेंडी, सुराज एक्का ने शासन से नए स्कूल भवन निर्माण की मांग की है। ताकि उनके बच्चे बिना किसी भय के पढ़ाई कर सके।
अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने नहीं दिया ध्यान
प्रधान पाठक खेदूराम साहू ने बताया कि स्कूल के जर्जर हालत की स्थिति से शिक्षा विभाग के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति जस के तस है। बच्चों को अभी बाहर बैठकर पढ़ाया जा रहा है, लेकिन बरसात में व्यवस्था नहीं होने पर मुस्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
जल्द अतिरिक्त कक्ष की होगी व्यवस्था-बीईओ
कोयलीबेड़ा बीईओ अर्जुन सिंह सर्फे ने बताया कि टेकामेटा प्राथमिक शाला के बच्चे कोरोना महामारी के चलते पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहे है। जर्जर भवन का प्रस्ताव भेजा गया है, जल्द ही अतिरिक्त कक्षा की व्यवस्था की जाएगी।
जल्द समस्या का होगा समाधान
अंतागढ़ विधायक अनूप नाग का कहना कि आपके माध्यम से हमें जानकारी मिली है। इससे गंभीरता से लिया जाएगा. जल्द ही समस्या का निराकरण किया जाएगा ।

