नई दिल्ली। कनाडा में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में भारत ने एक बार फिर अपनी बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। चीन और रूस की अनुपस्थिति के बीच भारत न केवल आमंत्रित देशों में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा, बल्कि विकासशील देशों यानी ग्लोबल साउथ की प्रमुख आवाज के रूप में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया की चुनौतियों के बीच G7 देशों ने भारत की कूटनीतिक क्षमता और आर्थिक मजबूती को विशेष महत्व दिया। सम्मेलन के दौरान भारत को विकसित और विकासशील देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में देखा गया।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत की भूमिका की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि भारत आज केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक नीति निर्माण में प्रभावी भागीदार बन चुका है। उन्होंने भारत को ग्लोबल साउथ की विश्वसनीय और मजबूत आवाज बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि, बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, संतुलित विदेश नीति और बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी उसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला रही है। G7 सम्मेलन ने इस बढ़ती स्वीकार्यता को और मजबूत किया है।
