बिलासपुर। जिंदल स्टील लिमिटेड को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कंपनी के खिलाफ जारी 153.55 करोड़ रुपये की रिकवरी नोटिस पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए बिना उस पर वित्तीय दायित्व नहीं डाला जा सकता। अदालत ने इस मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को सर्वोपरि बताते हुए पूर्व में पारित आदेश को निरस्त कर दिया। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि, जिंदल स्टील को उस प्रक्रिया में पक्षकार नहीं बनाया गया था, जिसके आधार पर कंपनी पर बड़ी वित्तीय देनदारी तय की गई। कोर्ट ने कहा कि जब किसी निर्णय का सीधा आर्थिक प्रभाव किसी संस्था पर पड़ता है, तो उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
मामला वर्ष 2011-12 और 2012-13 में बिजली आपूर्ति से जुड़ा है। बाद में टैरिफ पुनर्निर्धारण के दौरान बिजली की दरों में बदलाव किया गया, जिसके आधार पर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी ने जिंदल स्टील को 153.55 करोड़ रुपये लौटाने का नोटिस जारी किया था। साथ ही कंपनी का ओपन एक्सेस एनओसी भी रोक दिया गया था। हाईकोर्ट ने रिकवरी नोटिस और संबंधित आदेशों को रद्द करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग को निर्देश दिया है कि, वह जिंदल स्टील को सुनवाई का अवसर देकर दो माह के भीतर नए सिरे से निर्णय ले। तब तक कंपनी के खिलाफ किसी भी प्रकार की वसूली या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह फैसला उद्योग जगत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
