चार दशक बाद सुकमा के किसानों के खेतों में पहुंचा पानी, कोयाबेकुर नहर से बदली खेती की तस्वीर

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सुकमा। जिले के कोयाबेकुर और गोलाबेकुर क्षेत्र के किसानों के लिए लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत आई है। करीब 40 साल से बंद पड़ी कोयाबेकुर व्यपवर्तन योजना की नहर अब फिर से जीवित हो गई है और किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचने लगा है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन की पहल से नहर का पुनर्निर्माण किया गया, जिससे अब 100 से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। करीब 160 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से किसान धान के साथ-साथ अन्य लाभकारी फसलों की खेती भी कर सकेंगे।

साल 1983 में शुरू हुई यह परियोजना लंबे समय तक रखरखाव की कमी और क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण बंद पड़ी रही। किसान बारिश पर निर्भर रहने को मजबूर थे या फिर महंगी सिंचाई व्यवस्था का सहारा लेते थे। अब 2.74 किलोमीटर लंबी नहर की मरम्मत, सीसी लाइनिंग और जरूरी संरचनाओं के निर्माण के बाद इसमें दोबारा पानी बहने लगा है।

कलेक्टर अमित कुमार ने इसे क्षेत्र के किसानों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि नहर के पुनर्जीवन से कृषि उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीणों की आय में सुधार आएगा। किसान संपत यादव सहित ग्रामीणों ने सरकार का आभार जताते हुए कहा कि वर्षों बाद खेतों में पानी पहुंचने से खेती को नई उम्मीद मिली है। यह परियोजना सिर्फ सिंचाई सुविधा नहीं, बल्कि सुकमा के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और समृद्धि की नई शुरुआत है।