नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकता (Indian Citizenship) से जुड़े नियमों में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी एक ताजा गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आकर भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले लोगों को अपने मूल देश के पासपोर्ट की स्थिति का पूरा खुलासा करना होगा। नागरिकता नियम, 2009 में संशोधन करते हुए सरकार ने साफ कर दिया है कि इन तीनों देशों के आवेदकों को अपना वैध या एक्सपायर हो चुका पासपोर्ट अनिवार्य रूप से सरेंडर करना पड़ेगा।
गृह मंत्रालय ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 के तहत 2009 के नियमों की अनुसूची ‘आईसी’ में एक नया पैराग्राफ जोड़ा है। इसके तहत अब सुरक्षा और जांच-पड़ताल को पहले से कहीं ज्यादा पुख्ता बनाया जा रहा है। नए प्रावधान के मुताबिक, नागरिकता आवेदन की स्वीकृति मिलने के महज 15 दिनों के भीतर आवेदक को अपने नजदीकी वरिष्ठ डाक अधीक्षक या डाक अधीक्षक के पास जाकर अपना पासपोर्ट जमा करने की लिखित घोषणा करनी होगी।
यह नया कड़ा नियम मुख्य रूप से उन हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के अफगान, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी प्रवासियों पर लागू होगा, जो भारत की नागरिकता हासिल करना चाहते हैं। सरकार का मानना है कि इस कदम से नागरिकता देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और आवेदकों के पुराने दस्तावेजों की ठोस जांच-पड़ताल आसानी से की जा सकेगी।
