पेपर माफिया पर बुलडोजऱ का प्रहार कब?- रंजन श्रीवास्तव

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03 मई 2026 को जब देशभर के 5000 से ज्यादा परीक्षा केंद्रों पर और विदेश में 14 केंद्रों पर नीट-यूजी (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट), 2026 के 22 लाख से ज्यादा उम्मीदवार अपना टेस्ट देकर बाहर निकले तो उनके चेहरे पर एक राहत थी कि चलो उनकी साल भर की मेहनत सार्थक हुई और अब टेस्ट के रिजल्ट का इंतजार रहेगा. उनके पैरेंट्स भी इस आशा के साथ अपने बच्चों के परीक्षा केंद्रों पर घंटों खड़े रहे कि उनके बच्चों को इस टेस्ट की बदौलत देश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिल सकता है और करियर हमेशा के लिए बन जाएगा. पर बच्चों की और उनके पैरेंट्स की खुशी या राहत सिर्फ कुछ दिनों के बाद ही छीन गई और यह खुशी छीनने वाला था देश का वह माफिया तंत्र जो कि परीक्षा तंत्र को अपने कब्जे में लिए हुए है और बेखौफ अपने संगठित अपराध से हर वर्ष लाखों बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रहा है. ऐसा नहीं कि इस बार भी पेपर लीक की आशंका नहीं थी. पेपर लीक के बारे में खुसफुसाहट तो 3 मई के पहले ही शुरू हो गई थी जब छात्रों को सोशल मीडिया से पता चला कि देश के कुछ हिस्सों में नीट-यूजी 2026 का पेपर 30 हजार से लेकर 5 लाख रुपये में उपलब्ध है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, जो इस टेस्ट को आयोजित करने के लिए जिम्मेदार है, 3 मई के पहले से ही अपनी पीठ ठोंकने में व्यस्त थी. देश के शिक्षा मंत्री भी अपनी पीठ ठोंकने में व्यस्त थे. सरकार पांच राज्यों के चुनाव में व्यस्त थी. अगर पिछले वर्षों में हुए पेपर लीक की घटनाओं से केंद्र सरकार, विशेषकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी सचेत होते तो पेपर लीक की सूचना आते ही उस पर एक्शन ले लिए होते, पर ऐसा हुआ नहीं. यह नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और शिक्षा मंत्री को अच्छी तरह से पता है कि हर एक-दो वर्ष के अंतराल पर नीट का पेपर लीक होता है. ये तो वो पेपर लीक हैं जो जांच एजेंसियों के संज्ञान में आये. यह भी संभव है कि माफिया ने इस तरीके से काम किया हो कि कुछ वर्षों में हुए पेपर लीक की सूचना जांच एजेंसियों तक पहुंची भी ना हो. पर टेस्ट के पहले, टेस्ट के दौरान और उसके बाद भी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी इस बात के दावे करती रही कि टेस्ट फुलप्रूफ है और किसी भी तरह की किसी गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है. पर एक बार फिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी गलत साबित हुई और लाखों छात्रों के भविष्य पर एक बार फिर प्रश्नचिह्न लग गया. राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (स्ह्रत्र) की जांच ने खुलासा किया कि नीट 2026 की परीक्षा से पहले ही वॉट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स पर करीब 410 सवालों का एक सेट घूम रहा था. इनमें से 120 से ज्यादा सवाल असली पेपर से हूबहू मिलते थे. एसओजी के अनुसार जांच में यह सामने आया कि पेपर राजस्थान पहुंचने से पहले हरियाणा के रास्ते महाराष्ट्र के नासिक से आया था. अगर पिछले वर्षों के नीट-यूजी पेपर लीक की बात करें तो सिर्फ दो वर्ष पहले 2024 में भी पेपर लीक हुआ था. तब बिहार और गुजरात में पेपर माफिया का नेटवर्क उजागर हुआ था. सीबीआई की जांच में सामने आया कि पेपर लीक की जड़ झारखंड के हजारीबाग से थी. पता चला कि पेपर लीक माफिया तो 2010 से ही ब्लूटूथ डिवाइस से नकल करवाने का धंधा चला रहा था. पेपर लीक माफिया बेहद संगठित गिरोह का तंत्र है, जिस पर बिना परीक्षा तंत्र में शामिल कुछ जिम्मेदार अधिकारियों के वरदहस्त के वह सफल नहीं हो सकता. बताते हैं कि पेपर प्रिंटिंग प्रेस में जाने से लेकर उसके परिवहन तथा परीक्षा केंद्रों पर पेपर के सीलबंद पैकेट खुलने तक हर कदम पर भ्रष्टाचार की एक कड़ी मौजूद है. यह कहने की बात नहीं है कि नीट-यूजी देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक है. 2024 में 24 लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षा दी और एमबीबीएस की सीटें थीं लगभग एक लाख. 2026 में छात्रों की संख्या बाईस लाख पचहत्तर हजार से ज्यादा थी.