25 दिन केले के पत्तों पर रखकर डॉक्टरों ने बचाई नवजात की जान, दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित

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बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिला अस्पताल के SNCU में डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ और गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु की जान बचाकर मिसाल पेश की है। बच्चे को 25 दिनों तक विशेष देखभाल में रखा गया, जिसमें स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग कर उसका इलाज किया गया। यह नवजात ग्राम कोरसागुड़ा, विकासखंड उसूर का निवासी है, जिसे 4 अप्रैल को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था।

जांच में सामने आया कि, वह Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक दुर्लभ त्वचा रोग से ग्रसित था, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत एंटीबायोटिक थेरेपी शुरू की और 25 दिनों तक लगातार उपचार किया। इस दौरान बच्चे की नाजुक त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए पारंपरिक सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ केले के पत्तों का इस्तेमाल किया गया, जिससे घर्षण कम हो और संक्रमण का खतरा घटे।

पत्तों को नियमित रूप से बदलकर पूरी तरह हाइजीन का ध्यान रखा गया। डॉक्टरों के अनुसार यह केस बेहद जोखिम भरा था और समय पर इलाज न मिलता तो जान जा सकती थी। वहीं बच्चे के परिजनों ने चिकित्सकों की मेहनत को “चमत्कार” बताया और आभार व्यक्त किया। सिविल सर्जन ने भी मेडिकल टीम की सराहना करते हुए कहा कि, इस तरह के केस में त्वरित और सही उपचार ही जीवन बचा सकता है।