दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में उस समय हड़कंप मच गया, जब मासोड़ी इलाके में देर रात सड़क के बीचों-बीच एक बाघ दिखाई दिया। बीजापुर से दंतेवाड़ा की ओर आ रहे ट्रक ड्राइवर संतोष ने अचानक अपनी गाड़ी की हेडलाइट में बाघ को सड़क पर खड़ा देखा। सामने बाघ दिखाई देते ही ड्राइवर ने तत्काल ट्रक रोक दिया। कुछ देर तक वह वाहन के अंदर ही रहा और इसके बाद बाघ की तस्वीर भी ली। घटना की जानकारी ग्रामीणों और वन विभाग को दी गई, जिसके बाद विभाग की टीम ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि भोगाम निवासी ट्रक ड्राइवर संतोष गुरुवार रात बीजापुर से दंतेवाड़ा की ओर ट्रक लेकर आ रहा था। रात के समय जब वह मासोड़ी के पास पहुंचा, तभी उसकी गाड़ी की हेडलाइट सड़क पर खड़े बाघ पर पड़ी। अचानक सामने बाघ देखकर संतोष ने बिना जोखिम उठाए वाहन रोक दिया।
बाघ कुछ समय तक सड़क पर मौजूद रहा। इस दौरान ट्रक ड्राइवर ने सुरक्षित दूरी से उसकी तस्वीर ली। बाघ को सड़क पर देखने के बाद संतोष ने आसपास के ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी। इसके साथ ही वन विभाग की टीम को भी घटना के बारे में बताया गया। सूचना मिलते ही वन विभाग ने इलाके में बाघ की मौजूदगी की जांच शुरू कर दी। टीम ने आसपास के जंगल, खेतों और संभावित रास्तों की निगरानी की। अगले दिन गांव के खेतों में बाघ के पंजों के निशान मिलने की जानकारी सामने आई। इससे वन विभाग को इलाके में बाघ की मौजूदगी के और संकेत मिले हैं। पंजों के निशानों और बाघ के दिखाई देने की घटना के आधार पर विभाग ने आसपास के क्षेत्र में निगरानी और बढ़ा दी है।
4 से ज्यादा ट्रैप कैमरे लगाए
बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने इलाके में 4 से ज्यादा ट्रैप कैमरे लगाए हैं। अलग-अलग संभावित स्थानों पर लगाए गए इन कैमरों के माध्यम से बाघ की आवाजाही रिकॉर्ड करने का प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग उसकी गतिविधियों, संभावित रास्तों और मूवमेंट की लगातार निगरानी कर रहा है। वन विभाग की टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि बाघ किस दिशा से इलाके में पहुंचा और फिलहाल उसका मूवमेंट किस क्षेत्र में है। जंगल और खेतों के आसपास उसकी मौजूदगी को देखते हुए टीम लगातार गश्त कर रही है।
जंगल की ओर लौटने के लिए सुरक्षित रास्ते की तैयारी
वन विभाग का मुख्य उद्देश्य बाघ को सुरक्षित तरीके से आबादी वाले इलाके से दूर रखना है। विभाग की कोशिश है कि बाघ को किसी तरह का खतरा न हो और मानव-बाघ संघर्ष की स्थिति भी पैदा न हो। इसके लिए बाघ के जंगल की ओर लौटने के लिए संभावित सुरक्षित रास्ता तैयार किया जा रहा है। वन विभाग बाघ के मूवमेंट पर नजर रखते हुए ऐसे कॉरिडोर की पहचान कर रहा है, जिससे वह आबादी वाले इलाके में आए बिना जंगल की ओर वापस जा सके। अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम क्षेत्र में लगातार सक्रिय है।
ग्रामीणों को किया जा रहा जागरूक
बाघ की मौजूदगी को देखते हुए आसपास के गांवों में वन विभाग की ओर से मुनादी भी कराई जा रही है। ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लोगों से कहा जा रहा है कि रात के समय अकेले जंगल या खेतों की ओर जाने से बचें। वन विभाग ने ग्रामीणों से यह भी अपील की है कि यदि किसी को बाघ दिखाई देता है तो उसके पास जाने, उसका पीछा करने या उसे घेरने की कोशिश न करें। बाघ को देखकर भीड़ लगाने से बचें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें। फिलहाल मासोड़ी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी को लेकर वन विभाग सतर्क है। ट्रैप कैमरों और मैदानी निगरानी के जरिए बाघ के मूवमेंट की जानकारी जुटाई जा रही है। विभाग की प्राथमिकता बाघ की सुरक्षा के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
