लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र इस बार राजनीतिक रूप से काफी गर्म रहने के आसार हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट बैठक में मंगलवार को विधानमंडल के दोनों सदनों को आहूत किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके बाद तय हुआ कि यूपी विधानमंडल का मानसून सत्र 3 अगस्त से 6 अगस्त तक चलेगा। चार दिन तक चलने वाले इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को पूरा करने की तैयारी में है। वहीं, विपक्ष भी सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दों को लेकर रणनीति तैयार कर रहा है। माना जा रहा है कि इस बार विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
हाल में सामने आए राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर रुख अपना सकता है। समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को सदन में उठाने की तैयारी में हैं। विपक्ष सरकार से इस मामले में अब तक की गई कार्रवाई और जांच की स्थिति को लेकर जवाब मांग सकता है। विपक्ष की ओर से महंगाई, बेरोजगारी, बिजली व्यवस्था और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे भी उठाए जाने की संभावना है। समाजवादी पार्टी पहले भी इन मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधती रही है। ऐसे में मानसून सत्र में इन विषयों को लेकर हंगामा होने के आसार जताए जा रहे हैं।
वहीं, सरकार की ओर से भी विपक्ष के सवालों का जवाब देने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सरकार सदन के पटल पर अब तक की गई कार्रवाई का पूरा विवरण रख सकती है। इसके अलावा प्रदेश सरकार अपनी उपलब्धियों और विकास कार्यों को भी सदन में पेश करेगी। योगी कैबिनेट की बैठक के बाद जारी जानकारी के अनुसार, मानसून सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न अध्यादेशों के स्थान पर विधेयक लाने और अन्य महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को पूरा करने की योजना है।
विधानमंडल सत्र के दौरान सरकार की ओर से कई प्रस्तावों पर चर्चा और मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों को सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित कराने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मानसून सत्र छोटा होने के बावजूद इसमें कई बड़े मुद्दे उठ सकते हैं। विपक्ष सरकार को जनहित से जुड़े मामलों पर घेरने की कोशिश करेगा, जबकि सरकार अपनी नीतियों और फैसलों के जरिए जवाब देने की तैयारी में है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है। इसलिए इस मुद्दे पर सदन में चर्चा के दौरान माहौल गर्म होने की संभावना है। विपक्ष जहां सरकार से जवाबदेही की मांग करेगा, वहीं सरकार मामले में की गई कार्रवाई को अपनी ओर से प्रमुखता से रख सकती है। फिलहाल सभी दलों ने मानसून सत्र को लेकर अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सदन की कार्यवाही कितनी शांतिपूर्ण रहती है या फिर विपक्ष के हंगामे के कारण बार-बार व्यवधान देखने को मिलता है।
