सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महज आरोपों पर पूरे ससुराल को कोर्ट में नहीं घसीट सकते, दहेज उत्पीड़न का केस खारिज

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों और दहेज उत्पीड़न (धारा 498ए) के मामलों को लेकर एक बेहद ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि केवल सामान्य दावों और छोटे-मोटे आरोपों के आधार पर पति के रिश्तेदारों या पूरे ससुराल पक्ष पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। अदालत ने साफ किया कि किसी भी रिश्तेदार को आरोपी बनाने के लिए उनके खिलाफ ठोस और विशिष्ट सबूत पेश करना अनिवार्य है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस टिप्पणी के साथ मध्य प्रदेश के एक मामले में ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को पूरी तरह रद्द कर दिया।

यह मामला मध्य प्रदेश के गुना जिले का है, जहां साल 2019 में ब्याही एक महिला ने जनवरी 2023 में अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ प्रताड़ना तथा बंदूक से धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ससुराल वालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए सर्वोच्च अदालत ने सख्त टिप्पणी की कि जब वैवाहिक संबंध बिगड़ने लगते हैं, तो अक्सर गुस्से और कड़वाहट में पूरे परिवार को केस में घसीट लिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि कानून का इस्तेमाल किसी को प्रताड़ित करने वाले हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता। निचली अदालतों को भी हिदायत दी गई है कि वे ऐसे मामलों में पूरी सावधानी बरतें ताकि बिना किसी ठोस आधार के पति के दूर के रिश्तेदारों या परिवार को बेवजह अदालती कार्यवाही का सामना न करना पड़े।