चुनावी उम्मीदवारों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केस वापसी से पहले हाई कोर्ट की मंजूरी जरूरी

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नई दिल्ली। चुनाव के दौरान कथित तौर पर गलत हथकंडे और धनबल के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को सरकार या प्रशासन अपनी मर्जी से वापस नहीं ले सकेगा। इसके लिए संबंधित हाई कोर्ट की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।

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जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने कहा कि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों में लागू सुरक्षा व्यवस्था को चुनावी उम्मीदवारों तक भी बढ़ाया जाना चाहिए। अदालत का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक कारणों से मुकदमे वापस लेने की प्रवृत्ति निष्पक्ष न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव के दौरान नकदी की बरामदगी को लेकर भी सख्ती दिखाई। निर्देश के मुताबिक, यदि जांच के दौरान 10 लाख रुपये से अधिक नकदी मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों को आयकर विभाग को तत्काल सूचना देनी होगी। अदालत ने यह भी कहा कि, ऐसे मामलों की जांच में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और मामला दर्ज होने के एक वर्ष के भीतर जांच पूरी करने का प्रयास किया जाए। इस फैसले को चुनावी पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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