शेयर बाज़ार में आई रौनक: ईरान-अमेरिका तनाव घटने से सेंसेक्स 77,400 और निफ्टी 24,100 के पार; जानें कच्चे तेल और रुपये का हाल

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नई दिल्ली। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 358.92 अंक चढ़कर 77,245.83 पर पहुंच गया; निफ्टी 101.2 अंक बढ़कर 24,096.90 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 11 पैसे गिरकर 94.79 पर आ गया। जानकारी के अनुसार भू-राजनीतिक मोर्चे से आ रही सकारात्मक खबरों के बीच भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जोरदार तेजी दर्ज की गई। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभियान रोकने के नए प्रस्ताव की खबर से पश्चिम एशिया में युद्ध थमने की उम्मीद जगी है, जिससे निवेशकों की धारणा मजबूत हुई और घरेलू शेयर बाजारों में भारी उछाल आया है।

मुख्य सूचकांक: सेंसेक्स 500 से अधिक अंकों की छलांग लगाते हुए 77,413 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 (Nifty) 150 अंकों से ज्यादा की बढ़त के साथ 24,150 के पार निकल गया है।

ब्रॉडर मार्केट का शानदार प्रदर्शन: बड़ी कंपनियों के साथ-साथ छोटे और मझोले शेयरों में भी खरीदारी देखी गई। सुबह के सत्र में निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.7 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.6 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

टॉप गेनर्स और लूजर्स: मजबूत तिमाही नतीजों के कारण जोमैटो और ब्लिंकिट की मूल कंपनी ‘इटरनल’ के शेयर 4 प्रतिशत से अधिक उछलकर सेंसेक्स में टॉप गेनर रहे। इसके अलावा मारुति सुजुकी, अदाणी पोर्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इन्फोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज में भी 3 प्रतिशत तक की तेजी रही। दूसरी ओर, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फिनसर्व और एक्सिस बैंक के शेयरों में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

वहीं बाजार की इस तेजी के बावजूद विश्लेषक सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। भू-राजनीतिक तनावों के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल अभी भी 111 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार के अनुसार, कच्चे तेल का 110 डॉलर पर रहना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक नकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे मुद्रास्फीति का जोखिम और बढ़ जाता है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली भी बाजार पर दबाव डाल रही है। अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को एफआईआई ने 2,104 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की है। विजयकुमार का मानना है कि वैश्विक स्तर पर ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ से जुड़े शेयरों में आ रही भारी तेजी के कारण विदेशी निवेशक भारत से पूंजी निकालकर उन बाजारों में लगा रहे हैं। आपको बता दें की कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी फंड्स की निकासी का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखा। शुरुआती कारोबार में रुपया 11 पैसे कमजोर होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.79 के स्तर पर आ गया। एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी के अनुसार, आयातकों की तरफ से डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपया दबाव में है। वहीं, कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया गया है और ईरान ने अमेरिका से होर्मुज जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का अनुरोध किया है। शेयर बाजार की अगली दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान के शांति प्रस्ताव पर अमेरिका क्या रुख अपनाता है। इसके अलावा, निवेशकों की पैनी नजर राज्यों के चुनाव परिणामों (एग्जिट पोल) और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर फैसलों पर भी रहेगी। जब तक पश्चिम एशिया के तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं होती, तब तक बाजारों में अस्थिरता और उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना है।