बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रेलवे परियोजना के लिए जमीन देने वाले परिवार के नाती को पुनर्वास नीति के तहत नौकरी के लिए पात्र माना है। मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की पीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण जबलपुर के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भू-स्वामी के परिवार में अब तक किसी भी सदस्य को रोजगार नहीं मिला है, तो नाती के दावे पर विचार किया जाना चाहिए।
जांजगीर-चांपा का भूमि विवाद:
यह मामला जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसमंदा से जुड़ा है। यहां महेश राम के नाम दर्ज जमीन का अधिग्रहण 2012-13 से 2018 के दौरान रेलवे लाइन विस्तार के लिए किया गया था। इस के बदले महेश राम की पुत्री सावित्री बाई ने रोजगार का आवेदन दिया था, जिसे आयु सीमा का हवाला देकर निरस्त कर दिया गया। तत्पश्चात सावित्री बाई के पुत्र सनत कुमार कश्यप ने अपने नाना की अधिग्रहित जमीन के बदले नौकरी की मांग की। हालांकि रेलवे ने 2 सितंबर, 2011 की नीति का हवाला देते हुए इस दावे को खारिज कर दिया था। रेलवे का तर्क था कि नीति में नाती को रोजगार देने का नियम नहीं है और एक जमीन के बदले बार-बार नौकरी नहीं दी जा सकती। इसके बाद अधिकरण ने 31 जुलाई, 2025 को यशवंत मामले के आधार पर पुनर्विचार का निर्देश दिया था।
समाजसेवी अजय पप्पू मोटवानी को मुख्यमंत्री साय ने भेजा प्रशंसा पत्र, आभार जताया
बर्खास्त जवान की होगी बहाली:
एक अन्य निर्णय में उच्च न्यायालय ने होमगार्ड सैनिक गजाधर कुमार नाग की सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की पीठ ने जवान को नियमानुसार पुनः सेवा में बहाल करने के निर्देश दिए हैं। कांकेर जिले के ग्राम कोड़ाभाट निवासी सैनिक पर वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 28 अक्तूबर से 1 नवंबर तक रायपुर प्रवास के दौरान सुरक्षा ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का आरोप था।
बिना जांच कार्रवाई अनुचित:
सैनिक का कहना था कि वह 26 अक्तूबर से 2 नवंबर, 2016 तक मलेरिया और टाइफाइड से पीड़ित था। उसे कांकेर के शासकीय कोमल देव जिला अस्पताल में 26 अक्तूबर को भर्ती कराया गया था तथा 27 अक्तूबर को छुट्टी मिलने के पश्चात 2 नवंबर को आरोग्यता प्रमाण पत्र जारी हुआ था। अदालत ने पाया कि अधिकारियों ने बिना कारण बताओ नोटिस, आरोप पत्र अथवा विभागीय जांच के ही सैनिक की सेवाएं समाप्त कर दी थीं और जांच न कराने का कारण भी दर्ज नहीं था। अदालत ने राज्य सरकार की वैकल्पिक अपील वाली दलील निरस्त कर दी तथा चिकित्सा दस्तावेज और नियमों के अनुसार अनुपस्थिति अवधि पर विचार करने का आदेश दिया।
महतारी वंदन योजना से महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल, आत्मनिर्भरता के साथ बढ़ रहा आत्मविश्वास
