० दिल्ली में कांग्रेस की महारैली और कवर्धा में कुपोषण के मुद्दे पर भी भाजपा विधायक ने दी प्रतिक्रिया
रायपुर । चार राज्यों में हुए एमएलसी चुनावों में कांग्रेस को मिली हार को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी स्वार्थ की राजनीति करती है। उन्होंने दावा किया कि ईवीएम के बाद बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि अब बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करने वाली कांग्रेस क्या हाथ उठाकर चुनाव कराने की बात करेगी?
मीडिया से चर्चा के दौरान पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस की चुनावी हार पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को ईवीएम से होने वाले चुनाव पसंद नहीं हैं, लेकिन बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी उसे सफलता नहीं मिली। उन्होंने कांग्रेस की राजनीति और चुनावी मांगों पर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस की दिल्ली रैली पर भी साधा निशाना
एक नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली में छत्तीसगढ़ से हजारों कार्यकर्ताओं के शामिल होने के सवाल पर भाजपा विधायक ने कहा कि कांग्रेस राज्योत्सव से डरकर रैली में जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्योत्सव पूरे छत्तीसगढ़ का उत्सव है और कांग्रेस को इस अवसर पर कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए था। मिश्रा ने कहा कि रैली किसी दूसरे दिन भी आयोजित की जा सकती थी। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि राज्योत्सव के दिन रैली करने पर छत्तीसगढ़ महतारी उन्हें माफ नहीं करेगी।
कवर्धा में कुपोषण के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा
कवर्धा क्षेत्र में कुपोषण को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पुरंदर मिश्रा ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि वर्ष 2018 में जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब इस समस्या को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस खुद काम नहीं करती और भाजपा पर आरोप लगाती है।
फसल नुकसान पर सर्वे के बाद कार्रवाई का भरोसा
अर्नब चक्रवात के कारण किसानों की फसलों को हुए नुकसान के सवाल पर भाजपा विधायक ने कहा कि संबंधित अधिकारी सर्वे करेंगे। उन्होंने कहा कि सर्वे के बाद किसानों के हित में जो भी आवश्यक होगा, सरकार उस दिशा में कदम उठाएगी।
पुरंदर मिश्रा के इन बयानों के बाद चुनावी नतीजों, कांग्रेस की प्रस्तावित महारैली और प्रदेश में किसानों व कुपोषण से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक चर्चा तेज होने की संभावना है।
