करवा चौथ और ख़राब मौसम को लेकर ज्योतिष ने ये कहा…..

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o मौसम खराब होने पर चंद्रमा को अर्घ कैसे दें – विस्तृत विधि

कांकेर। ज्योतिष गुरु महावीर शर्मा नेकरवा चौथ का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक है, क्योंकि दिन भर निर्जला रहकर रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है। लेकिन कई बार बरसात घने बादल या कोहरे के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में घबराना नहीं चाहिए, हमारे शास्त्रों और लोक परम्परा में इसके सुंदर विकल्प दिए गए हैं। भाव ही सबसे बड़ा है, चंद्र देव बादलों के पीछे भी मौजूद हैं।चांदी के चंद्रमा या थाली के जल में चंद्रमा को अर्घ – सबसे प्राचीन विधि यह विधि हमारे दादी-नानी के समय से चली आ रही है।

विधि कैसे करें: तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें, उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, गंगाजल, अक्षत (चावल) और कुमकुम डालें।एक साफ थाली में थोड़ा जल भरें और उसमें चांदी का सिक्का, चांदी का छोटा चंद्रमा या चांदी की अंगूठी रख दें। चांदी को चंद्रमा का ही रूप माना गया है।अब उसी चांदी के टुकड़े को चंद्रमा मानकर मन में “ॐ चंद्रमसे नमः” का जाप करते हुए लोटे से अर्घ दें।अर्घ देते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए, जहां से चंद्रमा निकलता है।इसके बाद छलनी में से दीपक और फिर चांदी वाले चंद्रमा को देखकर अपने पति का दर्शन करें और व्रत खोलें।मान्यता है कि इससे व्रत 100% पूर्ण माना जाता है और कोई दोष नहीं लगता।हाल में सबसे प्रचलित सफेद चंदन से चांद का चित्रण आपकी बताई हुई अति पवित्र विधि यह विधि पिछले कुछ सालों में बहुत प्रसिद्ध हुई है, खासकर यूट्यूब और पंडितों द्वारा बताई जा रही है, और यह बहुत ही भावपूर्ण है।क्यों सफेद चंदन सफेद चंदन को श्वेत चंदन भी कहते हैं। इसका स्वभाव शीतल, सुगंधित और पवित्र होता है, ठीक चंद्रमा जैसा। शास्त्रों में चंद्रमा को शीतलता और मन का कारक कहा गया है, इसलिए सफेद चंदन से बना चंद्रमा सबसे पवित्र माना जाता है।

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विस्तृत विधि कैसे करें:
पूजा स्थान पर एक छोटी लकड़ी की चौकी या पाटा रखें, उस पर साफ कपड़ा बिछाएं। सफेद चंदन को गुलाब जल में घिसकर उसका पेस्ट बना लें। अगर सफेद चंदन न हो तो सफेद चंदन का पाउडर भी ले सकते हैं।अब अपनी अनामिका उंगली (रिंग फिंगर) से पाटे पर या एक थाली में गोल चंद्रमा का चित्र बनाएं। चित्र बिल्कुल पूर्ण गोल होना चाहिए।उस चंद्रमा के चित्र के अंदर थोड़ा कुमकुम का टीका लगाएं, अक्षत लगाएं और दो छोटी-छोटी आंखें और मुस्कान जैसी आकृति बना दें ताकि वह जीवंत लगे।उस चित्र के चारों ओर छोटी-छोटी बिंदियों से तारे भी बना सकते हैं।अब दीपक जलाएं, अगरबत्ती दिखाएं। छलनी हाथ में लें। पहले छलनी से दीपक को देखें, फिर उस चंदन वाले चंद्रमा को देखें और फिर अपने पति को देखें।इसके बाद “ॐ सोमाय नमः, ॐ चंद्रमसे नमः, ॐ श्री चंद्राय नमः” मंत्र का 11 या 21 बार जाप करते हुए अर्घ दे-इस विधि में चंद्रमा की शीतलता आपके घर में ही आ जाती है और मन को बहुत संतोष मिलता है।

केवल दिशा में अर्घ – अंतिम विकल्प
अगर ऊपर की दोनों चीजें उपलब्ध न हों तो यह सबसे सरल उपाय है।रात में जिस समय आपके शहर में चंद्रोदय का समय पंचांग में दिया है (रायपुर में लगभग 8 बजे के आसपास), उसी समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं।मन में कल्पना करें कि बादलों के पीछे सुंदर चंद्रमा चमक रहा है और आपको देख रहा है।दोनों हाथों से लोटा पकड़कर ऊंचाई से जल की धारा गिराएं और प्रार्थना करें – “हे चंद्र देव, बादलों के कारण आप दिखाई नहीं दे रहे, मेरे व्रत को स्वीकार करें और मेरे पति की लंबी आयु करें – 11 बार मंत्र जपें और जल को तुलसी में न गिराकर किसी पौधे में या साफ स्थान पर गिरने दें।

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अंत में ध्यान रखने योग्य बातें: – बिना अर्घ दिए कभी भी व्रत न खोलें
अर्घ के बाद पति के हाथ से जल पीकर और मिठाई खाकर ही व्रत खोलें।अगले दिन सुबह उस चंदन वाले चित्र को जल में विसर्जित कर दें।

अंतिम सूत्र याद रखें:
भाव सच्चा हो तो चंद्रमा कहीं भी है, असली चांद न दिखे तो चंदन वाला चांद ही सच्चा चांद है, और आपका व्रत पक्का है।ज्योतिष गुरु महावीर शर्मा भिलाई दुर्ग छत्तीसगढ़ 9301053976 पर संपर्क कर सकते आप ज्योतिषी संबंधित प्रत्येक कार्य किए जाते हैं कालसर्प पूजा महामृत्युंजय जाप दुर्गा उपासना कुलदेवी आराधना पूजन किया जाते हैं।