भाजपा राज में जनता परेशान,जनता के मुद्दों को लेकर आयुक्त के पास पहुँचे अरुण वोरा

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दुर्ग। दुर्ग से विधायक रहे अरुण वोरा ने आज नगर निगम आयुक्त से मुलाकात कर शहर की गंभीर जनसमस्याओं को लेकर चर्चा की और तत्काल समाधान की मांग की। उन्होंने कहा कि, भीषण गर्मी के बीच दुर्ग शहर पानी और बिजली की समस्या से जूझ रहा है, लेकिन शासन-प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।

वोरा ने कहा कि, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि, चार लाख लोगों की प्यास बुझाने वाली विशाल शिवनाथ नदी होने के बावजूद दुर्ग शहर में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है।दुर्ग शहर में लगभग 60 बड़े वार्ड हैं, मात्र 15 टैंकरों के भरोसे पूरे शहर की जलापूर्ति कैसे की जा रही है, इसका जवाब प्रशासन ही दे सकता है।हालत यह है कि लोगों को कई बार गुहार लगाने के बाद टैंकर पहुंच पा रहे हैं। पिछले डेढ़ महीने से हरिनगर वार्ड क्रमांक 59 सहित कई क्षेत्रों में लोग पानी की भारी किल्लत झेल रहे हैं। आम नागरिक अपनी दैनिक दिनचर्या तक नहीं चला पा रहे हैं और पूरा जनजीवन प्रभावित हो चुका है।

उन्होंने कहा कि, शहर के जिस भी वार्ड में जाइए, लोगों की एक ही शिकायत सुनने को मिलती है – “भैया विकास तो होता रहेगा, लेकिन पहले हमें पानी चाहिए।” भाजपा सरकार आने के बाद से लोगों को नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है। नलों में पानी नहीं आ रहा, हैंडपंप खराब पड़े हैं और शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कांग्रेस द्वारा विशाल धरना प्रदर्शन किए जाने के बावजूद शासन-प्रशासन नहीं चेता।

उन्होंने अमृत मिशन योजना के तहत लगाए गए भागीरथी नल योजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि उरला, पोटिया, बघेरा, कातुलबोड़ और सिकोला भाटा जैसे क्षेत्रों में लोगों ने शिकायत की कि जैसे ही पानी की सप्लाई शुरू होती है, बिजली गुल हो जाती है और पानी बंद होते ही बिजली वापस आ जाती है। इस बिजली की आग-मिचौली से जनता बेहद परेशान है। बघेरा क्षेत्र स्थित खिचरिया रेजीडेंसी में बिजली बाधित होने के कारण एक महिला लगभग दो घंटे तक लिफ्ट में फँसी रही। स्थानीय नागरिकों के अनुसार हर 3-4 दिन में इस प्रकार की घटनाएँ हो रही हैं, जिससे रहवासियों में भय का माहौल है।वोरा ने कहा कि भाजपा सरकार पर जनता ने जो विश्वास किया था, वह उस कसौटी पर पूरी तरह विफल साबित हुई है।अरुण वोरा ने आयुक्त से मांग की कि, शहर में पानी और बिजली की समस्याओं का तत्काल स्थायी समाधान किया जाए, खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराई जाए, टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाए तथा लगातार हो रही बिजली कटौती पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया जाए।