रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास और मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का शुभारंभ किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है और इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना हर पत्रकार की जिम्मेदारी है। समाचार प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पूरी पुष्टि जरूरी है, क्योंकि एक खबर का प्रभाव व्यक्ति और समाज दोनों पर पड़ सकता है।
रमेन डेका ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव से मीडिया और पत्रकारिता तेजी से बदल रही है। विश्वविद्यालय में स्थापित मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र विद्यार्थियों को नई तकनीकों को समझने और उनके जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर उपलब्ध सूचनाओं को लेकर भी सतर्क रहने की बात कही। उनके अनुसार सोशल मीडिया की हर जानकारी जरूरी नहीं कि सही हो, इसलिए पत्रकारों को तथ्य-जांच के बाद ही समाचार प्रसारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है और बेहतर पत्रकार वह है जो सबसे पहले खबर देने के बजाय सही, तथ्यपरक और जिम्मेदारी से खबर दे।
राज्यपाल ने सावित्रीबाई फुले के महिला शिक्षा और नारी सशक्तिकरण के लिए किए गए योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके नाम पर कन्या छात्रावास का नामकरण छात्राओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का अवसर देगा। छात्रावास दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनकी उच्च शिक्षा व प्रतिभा विकास में मदद करेगा। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रेरणास्रोत स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनसे जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए।
रमेन डेका ने कहा कि आधुनिक दौर में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, एआई और सोशल मीडिया के बावजूद प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता बनी हुई है। पत्रकारिता को समाज के अंतिम व्यक्ति की समस्याओं और जरूरतों को सामने लाने के साथ व्यवस्था में सुधार की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने अनसुने नायक-नायिकाओं के कार्यों को समाज तक पहुंचाने पर भी जोर दिया। साथ ही विद्यार्थियों के कल्याण को प्राथमिकता देने, विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाकर कम से कम एक हजार करने तथा पाठ्यक्रमों की आवश्यक मान्यता और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में कुलपति मनोज दयाल सहित विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, प्राध्यापक, अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।


