बिलासपुर। बिलासपुर जिले के सीपत थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़की के अपहरण के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत बालिका को सुरक्षित बरामद कर लिया और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह मामला 8 अगस्त 2025 का है, जब प्रार्थी ने थाना सीपत में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग बेटी को एक अज्ञात व्यक्ति बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर जांच शुरू की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिलासपुर पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और साइबर सहायता के माध्यम से आरोपी की तलाश तेज की। जांच में पता चला कि आरोपी संत कुमार शाह, बालिका को लेकर राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ क्षेत्र में छिपा हुआ है। सूचना के आधार पर सीपत पुलिस की टीम ने डोंगरगढ़ पुलिस के सहयोग से दबिश दी और बालिका को सुरक्षित बरामद कर लिया। साथ ही मौके से आरोपी को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में राहत और संतोष का माहौल देखा गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर उसके साथ शारीरिक शोषण किया था। इस आधार पर पुलिस ने मामले में गंभीर धाराएं जोड़ी हैं। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 87, 64(एम) और पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) एवं 6 के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार आरोपी संत कुमार शाह उम्र 21 वर्ष है, जो ग्राम दर्राभाठा, थाना सीपत का निवासी बताया गया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष टीमों को सक्रिय किया गया है और ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत लगातार लापता बच्चों की तलाश की जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य नाबालिगों की सुरक्षित बरामदगी और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की सक्रियता की सराहना की जा रही है। वहीं प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि बच्चों और महिलाओं से जुड़े अपराधों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल डेटा, संपर्क और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसमें और लोग तो शामिल नहीं थे। यह मामला एक बार फिर इस बात को दर्शाता है कि तकनीकी जांच और त्वरित पुलिस कार्रवाई से गंभीर अपराधों में भी समय पर सफलता प्राप्त की जा सकती है।
