वाशिंगटन। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने जन्म से नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को असंवैधानिक करार दिया है, जिसमें कुछ श्रेणी के बच्चों को जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता देने पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे को नागरिकता का अधिकार देता है, चाहे उसके माता-पिता की आव्रजन स्थिति कुछ भी हो। नौ सदस्यीय पीठ ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि, किसी राष्ट्रपति का कार्यकारी आदेश संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जन्मजात नागरिकता के अधिकार में बदलाव केवल संवैधानिक प्रक्रिया से ही संभव है।
यह फैसला अमेरिका में रह रहे लाखों प्रवासी परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। खासतौर पर H-1B और L-1 वीजा पर काम कर रहे भारतीय पेशेवरों को इससे लाभ मिलेगा। यदि ट्रंप का आदेश लागू रहता, तो अमेरिका में जन्म लेने वाले उनके बच्चों की नागरिकता प्रभावित हो सकती थी। गौरतलब है कि, अमेरिका में पिछले डेढ़ सौ वर्षों से अधिक समय से जन्म के आधार पर नागरिकता देने की व्यवस्था लागू है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने इस संवैधानिक अधिकार को बरकरार रखते हुए साफ कर दिया है कि कार्यकारी आदेश के जरिए नागरिकता संबंधी मूल अधिकारों में बदलाव नहीं किया जा सकता।
