दुर्ग। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर ज़ोनल ऑफिस ने अवैध सट्टेबाजी (महादेव ऑनलाइन बुक और अन्य) के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत एक और प्रोविजऩल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है। इसके तहत विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनके मालिकाना हक या कंट्रोल वाली कंपनियों की चल और अचल संपत्तियों को ज़ब्त किया गया है। इनकी कुल कीमत लगभग 940.77 करोड़ रुपये है। ज़ब्त की गई संपत्तियों में रिहायशी प्रॉपर्टी, ज़मीन के टुकड़े, इक्विटी शेयर और अन्य सिक्योरिटीज़ शामिल हैं। यह ज़ब्ती महादेव ऑनलाइन बुक / स्काईएक्सचेंज अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।
अवैध कमाई को फर्जी कंपनियों में लगाया गया- ईडी की जांच से यह भी पता चला कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज के गैर-कानूनी सट्टेबाजी के काम से हुई अवैध कमाई को शेल एंटिटीज (फर्जी कंपनियों) के जाल और कई तरह के लेन-देन के ज़रिए अकोमोडेशन एंट्री के एक मल्टी-लेयर्ड स्ट्रक्चर के माध्यम से लॉन्डर किया गया। इसका मकसद अवैध पैसे को वैध दिखाना था। जांच में पता चला कि महादेव ऑनलाइन बुक /स्काईएक्सचेंज सट्टेबाजी के काम से हुई लगभग 940.77 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को इसी तरह विकास गर्ग के मालिकाना हक और कंट्रोल वाली कंपनियों में भेजा गया। इस पैसे को कई कंपनियों के ज़रिए घुमाया गया और इसका इस्तेमाल शेयर, सिक्योरिटीज़ और दूसरी संपत्तियां खरीदने जैसे कामों में किया गया।
सात प्रोविजऩल अटैचमेंट ऑर्डर जारी
इससे पहले इस मामले में सात प्रोविजऩल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं और रायपुर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट्स (जिसमें सप्लीमेंट्री कंप्लेंट्स भी शामिल हैं) दायर की जा चुकी हैं। कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का संज्ञान लिया है। इस मामले में पहले ही लगभग 2,825 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां (जिनमें विदेशी संपत्तियां भी शामिल हैं) अटैच/ज़ब्त/फ्रीज़ की जा चुकी थीं। मौजूदा अटैचमेंट के साथ, इस मामले में अटैच/ज़ब्त/फ्रीज़ की गई संपत्तियों की कुल कीमत बढक़र लगभग 3,800 करोड़ रुपये हो गई है।
फ्रैंचाइज़ी-आधारित पैनल नेटवर्क के ज़रिए काम
ईडी ने छत्तीसगढ़ पुलिस (दुर्ग) द्वारा दर्ज एफआईआर और आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि की पुलिस द्वारा अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के ऑपरेटरों, प्रमोटरों और सहयोगियों के खिलाफ दर्ज कई अन्य एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। इन एफआईआर में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए गए थे। ईडी की जांच से पता चला कि सट्टेबाजी सिंडिकेट विदेश से चलाए जा रहे फ्रैंचाइज़ी-आधारित पैनल नेटवर्क के ज़रिए काम करता था। अवैध सट्टेबाजी से हर महीने 450 करोड़ रुपये से ज़्यादा की अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) कर रहा था।
