रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम परिसर में उरांव (सरना) आदिवासी विकास संघ द्वारा आयोजित करम पूजा परब 2026 में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने करम राजा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने भारत माता के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ भी किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि करम परब जनजातीय संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं और पूर्वजों की अमूल्य धरोहर का प्रतीक है। यह पर्व प्रकृति के प्रति आस्था, प्रेम और सम्मान की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने की जो परंपरा विकसित की, उससे आज भी समाज को महत्वपूर्ण सीख मिलती है। करम परब प्रकृति संरक्षण, सामाजिक एकता और सामूहिक जीवन के मूल्यों का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपर्वों और प्रकृति से गहरे जुड़ाव से है। विभिन्न जनजातीय समाजों ने अपनी विशिष्ट परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखा है। करम परब भी ऐसी ही परंपरा है, जो परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना के साथ आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव की प्रेरणा देता है।
साय ने कहा कि सांस्कृतिक परंपराएं केवल उत्सव मनाने का माध्यम नहीं, बल्कि इनमें पूर्वजों का ज्ञान, जीवनमूल्य और समाज को एकजुट रखने की भावना समाहित है। आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना भी जरूरी है। नई पीढ़ी को भाषा, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक पर्वों से जोड़ना चाहिए, ताकि सांस्कृतिक विरासत आगे भी जीवंत बनी रहे। उन्होंने उरांव समाज की ओर से परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रायपुर जिले के गनोद गांव में उरांव समाज के लिए 50 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भवन बनने से समाज को सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के आयोजन के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी। कार्यक्रम में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी, समाज प्रमुख बिन्देश्वर भगत, उरांव (सरना) आदिवासी विकास संघ के पदाधिकारी, वरिष्ठजन और बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
