इस तेल में विटामिन डी है। ये एकदम शुद्ध शहद है, इसमें शक्कर नहीं है। चौदह दिन में गोरापन पाइए, फलानी क्रीम लगाइए…। लेकिन अब थोड़ा ठहर जाइए। पहली बात तो यह है कि इस तरह के भ्रामक विज्ञापनों के भ्रमजाल में फंसना ही नहीं चाहिए। लेकिन समस्या यह है कि विज्ञापनों को जिस तरह से पेश किया जाता है, लोग उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते। और, कई बार तो ये कह कर सामान ले लिया जाता है कि लेकर देखते हैं। एक का दावा झूठा निकला, तो जरूरी नहीं कि दूसरे का दावा भी गलत निकल जाए। बस यही चलता रहता है और कंपनियां हमें ठगती रहती हैं। शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानि एफएसएसएआई ने कंपनियों के भ्रामक विज्ञापनों और झूठे दावों पर बड़ा प्रहार किया है। असल में, खाद्य सामग्री बेचने वाली छह प्रमुख कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा था। नियामक की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद सभी छह कंपनियों ने सरेंडर कर दिया है। इन कंपनियों ने बाजार से अपने विवादित लेबल, झूठे दावे और भ्रामक ट्रेडमार्क वापस ले लिए हैं। पहले तो बात करते हैं प्राधिकरण की कार्रवाई की। एफएसएसएआई ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से इस पूरी कार्रवाई की जानकारी साझा की है। नियामक का कहना है कि नोटिस मिलते ही संबंधित खाद्य कारोबारियों ने तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए हैं। कंपनियों ने न केवल विवादित दावों को हटा लिया है, अपितु वे अपनी पूरी पैकेजिंग को भी बदल रही हैं। उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ रोकने और खाद्य सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए यह देशव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। नियामक की जांच में लवयोर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड का मामला सबसे प्रमुखता से सामने आया। यह कंपनी अपने उत्पाद लिवयोर रोस्टेड एडामामे बीन्स के पैकेट पर धड़ल्ले से वीगन और हेल्दी लिख कर बेच रही थी। जांच के दौरान जब इन दावों के प्रमाण मांगे गए, तो कंपनी कोई ठोस वैज्ञानिक आधार पेश नहीं कर सकी। एफएसएसएआई का नोटिस मिलते ही कंपनी के होश उड़ गए। कंपनी ने नियामक को अपना लिखित जवाब सौंपा। अपने स्पष्टीकरण में कंपनी ने स्वीकार किया कि नियामक आवश्यकताओं की जानकारी न होने के कारण लेबल पर ये दावे अनजाने में छप गए थे। कंपनी ने इस गंभीर चूक के लिए नियामक से औपचारिक रूप से माफी मांगी है। साथ ही भरोसा दिलाया है कि भविष्य में ऐसी गलती दोहराई नहीं जाएगी। कंपनी ने बाजार में मौजूद पुरानी पैकेजिंग सामग्री को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि गैर-अनुपालन वाले रैपर का दोबारा इस्तेमाल न हो सके। एफएसएसएआई की इस सख्त कार्रवाई की जद में कई अन्य नामी गिरामी कंपनियां भी आई हैं। नियामक के कड़े रुख को देखते हुए अन्य कंपनियों ने भी चुपचाप अपने स्तर पर सुधार करना शुरू कर दिया है। इनमें बाबा रामदेव की कंपनियां भी शामिल हैं और डाबर जैसा बड़ा एवं प्रतिष्ठित ब्रांड भी। ऑनेस्ट इनोवेशन्स फॉर यू प्राइवेट लिमिटेड और हेलियोस्टोन स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड अपने ब्रांड नाम और ट्रेडमार्क के जरिए उपभोक्ताओं को गुमराह कर रही थीं। नोटिस मिलते ही दोनों कंपनियों ने अपने विवादास्पद ट्रेडमार्क बदलने की घोषणा कर दी है। राजस्थान एग्रो एंड जनरल इंडस्ट्रीज ने अपने खाद्य उत्पादों से जुड़े सभी बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों को तुरंत हटा दिया है। इसके अलावा कंपनी ने अपने प्रचार-प्रसार से पीपीएम शब्द का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया है। यही नहीं, आयोटा नैनोटेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड पैकेज्ड वाटर के नाम पर भ्रामक दावे कर रही थी। एफएसएसएआई के निर्देश के बाद कंपनी ने लेबल से सभी झूठे दावे हटा दिए हैं। इसके साथ ही अमानक पानी के उत्पादन पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है। पंचामृत इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड अपने एक इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक को लेकर कटघरे में थी। कार्रवाई के डर से कंपनी ने विवादित पेय पदार्थ को अपनी आधिकारिक वेबसाइट और बिक्री मंचों से पूरी तरह से हटा लिया है।
