नई दिल्ली। देश की राजधानी में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने वैश्विक व्यवस्था को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी नीतियों का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय कानून को दरकिनार कर थोपे गए एकतरफा दंडात्मक उपाय और टैरिफ पूरी दुनिया के लिए खतरा बन रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि, दबाव की कूटनीति कभी भी संवाद का विकल्प नहीं हो सकती। जयशंकर के मुताबिक, इस तरह के प्रतिबंध न केवल विकासशील देशों की कमर तोड़ रहे हैं, बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास में भी बड़ी बाधा बन रहे हैं।
बैठक के दौरान भारत ने न केवल आर्थिक बल्कि सुरक्षा चुनौतियों पर भी दुनिया का ध्यान खींचा। विदेश मंत्री ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को दोहराते हुए कहा कि सीमा पार आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों की मर्यादा का उल्लंघन है और इसके किसी भी स्वरूप को जायज नहीं ठहराया जा सकता। पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात पर चिंता जताते हुए उन्होंने गाजा, लेबनान और सूडान जैसे संघर्ष क्षेत्रों में तुरंत समन्वित कूटनीतिक प्रयास शुरू करने की अपील की। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि, लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का सुरक्षित होना वैश्विक आर्थिक कल्याण के लिए अनिवार्य है। भारत ने इस मंच से स्पष्ट कर दिया कि, आज के समय में सहयोग कोई विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता है। एक न्यायसंगत और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण के लिए भारत ने ब्रिक्स देशों से एकजुट होकर डिजिटल विभाजन को पाटने और विकासशील देशों की कमजोरियों को प्रबंधित करने का आह्वान किया है।
