नई दिल्ली। देश में मानसून की कमजोर स्थिति का असर खरीफ फसलों की बुआई पर दिखाई देने लगा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 14 अगस्त तक खरीफ फसलों का कुल बुआई क्षेत्र 1016.57 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1037.52 लाख हेक्टेयर था।
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सबसे ज्यादा चिंता धान के रकबे को लेकर है। इस साल अब तक धान की बुआई 379.07 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष के 393.44 लाख हेक्टेयर से कम है। कमजोर मानसून और मौसम में बदलाव को इसके पीछे प्रमुख कारण माना जा रहा है। मिलेट्स का रकबा भी घटकर 172.96 लाख हेक्टेयर रह गया। वहीं, दालों की बुआई लगभग स्थिर रही और गन्ने तथा कपास के क्षेत्रफल में मामूली बदलाव दर्ज किया गया।
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किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने 2026-27 मार्केटिंग सीजन की 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। सरकार का लक्ष्य किसानों को लागत पर बेहतर रिटर्न देने के साथ दालों, तिलहन और पौष्टिक अनाज की खेती को बढ़ावा देना है। जानकारों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति खरीफ उत्पादन की तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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