नयी दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार 25 जुलाई को दिये गये आश्वासनों और वादों (जैसे प्रदर्शनकारियों पर दर्ज प्राथमिकी वापस लेना) पर तत्काल अमल नहीं करती है, तो पार्टी दो दिनों के भीतर देशव्यापी आंदोलन पर बड़ा फैसला लेगी। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने दिन की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से प्राथमिकी की एक संयुक्त सूची तीन बार मांगी लेकिन केंद्र के अधिवक्ता ने जानकारी देने का कोई वादा नहीं किया और इस कदम का विरोध किया।
दास ने इस घटनाक्रम को उन वादों से जोड़ा जो सरकार ने 25 जुलाई को किए थे, जब सीजेपी ने अपना देशव्यापी आंदोलन वापस ले लिया था। उनके अनुसार इन वादों में प्राथमिकी वापस लेना, प्रदर्शनकारियों को दंडात्मक कार्रवाई से बचाना और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देना शामिल था। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय की ओर से संयुक्त सूची की मांग किये जाने से केंद्र और भाजपा/राजग शासित राज्यों द्वारा किये गये वादों को लागू करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने दावा किया कि अदालत ने एक विकल्प भी सुझाया, जिसके तहत गंभीर आपराधिक अपराधों का इतिहास रखने वाले लोगों से जुड़ी प्राथमिकी की अलग से पहचान की जा सकती है, ताकि ऐसे मामलों पर उनके अलग-अलग आधारों पर विचार किया जा सके।
उन्होंने सरकार के इरादों पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं को यह जानने का अधिकार है कि क्या 25 जुलाई के वादों को लागू किया जाएगा या वे केवल देशव्यापी आंदोलन को खत्म करने के लिए किये गये थे।
सीजेपी नेता ने कहा कि संगठन ने संयम बरता है, सरकार के साथ अच्छे इरादों से बातचीत की है और वादों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी का धैर्य खत्म हो रहा है और कहा कि अगर सरकार 25 जुलाई के वादों को पूरा करने की दिशा में तत्काल और ठोस कदम नहीं उठाती है, तो सीजेपी अगले दो दिनों के भीतर अपनी राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक बुलायेगी। उन्होंने कहा कि समिति पार्टी की अगली देशव्यापी कार्रवाई के बारे में फैसला करेगी।
दास ने कहा कि आगे की कार्रवाई का स्वरूप सरकार की ओर से उठाये गये कदमों पर निर्भर करेगा। उन्होंने दोहराया कि आंदोलन को रोकने का पार्टी का फैसला इस उम्मीद पर आधारित था कि देश के सामने किये गये वादों को पूरा किया जायेगा।
