धमतरी: मखाना खेती बनेगी किसानों की नई आय का आधार- मंत्री रामविचार नेताम

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मखाना खेती बनेगी किसानों की नई आय का आधार : मंत्री रामविचार नेताम
ग्राम छाती में मखाना उत्पादन का किया निरीक्षण, प्रसंस्करण, विपणन एवं महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने पर दिया जोर

धमतरी/रायपुर। प्रदेश के कृषि विकास एवं किसान कल्याण, आदिम जाति विकास, जैव प्रौद्योगिकी, मछलीपालन तथा पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम ने अपने धमतरी प्रवास के दौरान बुधवार को विकासखंड कुरूद के ग्राम छाती में संचालित मखाना खेती का निरीक्षण किया। जिला प्रशासन तथा कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के समन्वित प्रयासों से विकसित इस नवाचार का अवलोकन करते हुए उन्होंने मखाना उत्पादन की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली तथा इसे किसानों, विशेषकर महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक सशक्तता का प्रभावी माध्यम बताया।

निरीक्षण के दौरान मंत्री नेताम खेत में पहुंचे और मखाना के बीज रोपण, पौधों की वृद्धि, फसल प्रबंधन, फल परिपक्व होने तथा जलाशय से फल निकालकर पारंपरिक विधि से प्रसंस्करण कर तैयार मखाना बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया को बारीकी से देखा। अधिकारियों ने बताया कि, मखाना की फसल सामान्यतः 6 से 8 माह में तैयार होती है, जिसके बाद प्रसंस्करण के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाला मखाना प्राप्त किया जाता है।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि, ग्राम छाती में महिला शैलपुत्री एवं नई किरण महिला स्व-सहायता समूह द्वारा लगभग 29 एकड़ क्षेत्र में मखाना की सफल खेती की जा रही है। यह पहल स्थानीय महिलाओं को रोजगार एवं नियमित आय उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्र में वैकल्पिक कृषि को भी नई दिशा दे रही है।

मंत्री नेताम ने कहा कि, मखाना एक उच्च मूल्य की पोषक एवं बाजार में बढ़ती मांग वाली फसल है, जो किसानों की आय बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं रखती है। उन्होंने उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, विपणन तथा महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि, ऐसी नवाचार आधारित खेती को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सकती है।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि, जिले में वर्तमान में लगभग 80 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती की जा रही है। इसके अलावा नगरी विकासखंड में 100 एकड़ अतिरिक्त क्षेत्र में मखाना उत्पादन का विस्तार करने की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। किसानों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है, जिससे भविष्य में जिले को मखाना उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।

उन्होंने बताया कि, जिला प्रशासन किसानों की आय में वृद्धि, फसल विविधीकरण तथा महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कृषि आधारित नवाचारों को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है। मखाना खेती इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे रोजगार सृजन के साथ ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी सिद्धार्थ कोमल, संचालक कृषि राहुल देव, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कुरूद, उप संचालक कृषि मोनेश साहू, उप संचालक पशुपालन मरकाम, सहायक संचालक उद्यानिकी गीता साहू, सहायक संचालक मछलीपालन कमल कुमार, कृषि महाविद्यालय के प्राध्यापक, अधिकारी-कर्मचारी, छात्र-छात्राएं तथा विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।