रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में केंद्र सरकार के सहयोग के प्रति धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता सरकार के दृढ़ संकल्प, जनभागीदारी और विकास आधारित रणनीति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का नया दौर शुरू हुआ है।
विजय शर्मा ने कहा कि एक समय देश के अधिकांश माओवादी बस्तर क्षेत्र में सक्रिय थे, जिनमें बड़ी संख्या नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर जिलों में केंद्रित थी। उन्होंने कहा कि वर्षों तक नक्सल हिंसा के कारण हजारों परिवार प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की जान गई। उनके अनुसार, जिन मामलों में पहले अपराध दर्ज नहीं हो पाए थे, उन्हें अब पंजीबद्ध कर पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले गांवों में भय का ऐसा माहौल था कि कई परिवार अपने किशोर बच्चों को भी माओवादियों के हवाले करने को मजबूर हो जाते थे, जबकि आज वही क्षेत्र विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ा बदलाव सरकार के संकल्प का रहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुरक्षा बलों को पूरी स्वतंत्रता और विश्वास के साथ काम करने का अवसर दिया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। विजय शर्मा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद नक्सलवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। उन्होंने झीरम घाटी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र पर हमला करने वालों का किसी भी रूप में महिमामंडन नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने बताया कि गोंड, हल्बा, भतरा, मुरिया और माड़िया समाज के प्रमुखों ने युवाओं को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अक्टूबर 2025 में हुए पुनर्वास अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और समाज के लोगों का भी उल्लेखनीय योगदान रहा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इलवद पंचायत योजना के तहत जिन पंचायतों में माओवादी गतिविधियों से जुड़े सभी लोग आत्मसमर्पण कर ग्राम सभा द्वारा इसकी घोषणा की जाती है, वहां एक करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में केंद्रीय सुरक्षा बलों के सहयोग से 118 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं। डीआरजी, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और बीएसएफ सहित सभी सुरक्षा बलों ने अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और बेहतर समन्वय से सुरक्षा अभियानों को नई मजबूती मिली है।
विजय शर्मा ने कहा कि जिन सुरक्षा कैंपों का कभी विरोध होता था, आज वहीं अस्पताल, स्कूल, आंगनबाड़ी, खेल परिसर और विकास केंद्र बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पीएमजीएसवाई के तहत लंबित 220 किलोमीटर की 93 सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि अन्य परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी है। बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में बैंक, बस सेवा, आवास और आधार पंजीकरण जैसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पुनर्वास नीति को और प्रभावी बनाया है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘सुनो नक्सली हमारी बात’ अभियान के तहत नक्सल प्रभावित युवाओं को राष्ट्रपति से मुलाकात का अवसर भी दिया गया। उन्होंने कहा कि बस्तर का भविष्य अब बंदूक नहीं, बल्कि शिक्षा, विकास, खेल और सहकारिता तय करेगी। साथ ही लोगों से जंगल और विकास कार्यों को लेकर फैलाए जा रहे दुष्प्रचार से बचने की अपील की।
