नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में औद्योगिक धातु कॉपर यानी तांबे की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। हाल ही में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद कॉपर अब दबाव में आ गया है और इसमें करीब 3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका में बढ़ती महंगाई और मजबूत होता डॉलर बताया जा रहा है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है।
महंगाई के बढ़ते आंकड़ों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर कर दिया है। इसके साथ ही डॉलर इंडेक्स में बढ़ोतरी ने अन्य मुद्राओं में धातुओं को और महंगा बना दिया है, जिससे मांग पर असर पड़ा है। लगातार आठ दिनों की तेजी के बाद यह गिरावट दर्ज की गई है, जो पहले खदानों में बाधा और तकनीकी शेयरों में तेजी के कारण आई थी।

कॉपर का उपयोग वायरिंग, इलेक्ट्रिक वाहन और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए इसे वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन सप्लाई और डिमांड के संतुलन में बड़े बदलाव की संभावना कम है। चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर उपभोक्ता है, वहां भी मांग में हल्की कमजोरी देखने को मिल रही है। निर्माता कंपनियों के नए ऑर्डर घटने से कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। लंदन मेटल एक्सचेंज में कॉपर की कीमत घटकर 13,765 डॉलर प्रति टन पर आ गई, जबकि जिंक जैसी अन्य धातुओं में भी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक संकेतक ही धातु बाजार की दिशा तय करेंगे।
