मुंबई। महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय को दिए गए 5 प्रतिशत आरक्षण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ा विवाद सामने आया है। राज्य सरकार ने अदालत में स्पष्ट कहा कि, यह आरक्षण 2014 में लाए गए अध्यादेश के साथ ही उसी वर्ष स्वतः समाप्त हो गया था और बाद में इसे कानून का रूप नहीं दिया गया। दरअसल, एक याचिका में फरवरी 2026 के सरकारी प्रस्ताव को चुनौती दी गई है, जिसमें 2014 से जुड़े सभी प्रावधानों को निरस्त करने की बात कही गई थी। याचिकाकर्ता ने इसे मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव बताते हुए असंवैधानिक करार दिया है।
मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने हलफनामा पेश कर कहा कि, 2014 का अध्यादेश 23 दिसंबर को ही समाप्त हो गया था, इसलिए वर्तमान में किसी भी प्रकार का आरक्षण लागू नहीं था। सरकार का तर्क है कि फरवरी 2026 का आदेश केवल पुराने, निष्प्रभावी प्रावधानों को औपचारिक रूप से समाप्त करने के लिए जारी किया गया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि, संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण देने की अनुमति नहीं देता। ऐसे में केवल धार्मिक पहचान के आधार पर किसी विशेष समुदाय को आरक्षण नहीं दिया जा सकता। वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष ने सरकार के फैसले को मनमाना और भेदभावपूर्ण बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। अब इस मामले में 4 मई को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
