अनहेल्दी फूड हैबिट्स से बिगड़ रही बच्चों की सेहत

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आज के समय में बच्चों में बढ़ता मोटापा यानी चाइल्डहुड ओबेसिटी तेजी से एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। पहले यह समस्या ज्यादातर वयस्कों में देखी जाती थी, लेकिन अब छोटे बच्चों में भी वजन बढ़ने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण बदलती जीवनशैली है, जिसमें बच्चों की शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो गई हैं और खानपान की आदतें भी पहले जैसी नहीं रही हैं। आजकल बच्चे बाहर खेलकूद में समय कम बिताते हैं और ज्यादातर समय मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर स्क्रीन के सामने रहते हैं। इस वजह से शरीर की कैलोरी खर्च नहीं हो पाती और धीरे-धीरे वजन बढ़ने लगता है। इसके साथ ही फास्ट फूड, जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों का बढ़ता सेवन भी इस समस्या को और ज्यादा बढ़ा रहा है। पिज्जा, बर्गर, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और पैकेज्ड स्नैक्स जैसे खाद्य पदार्थ बच्चों की डाइट का हिस्सा बनते जा रहे हैं, जिनमें कैलोरी तो अधिक होती है लेकिन पोषण कम होता है। इसके अलावा खाने के समय में अनियमितता भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

कई बच्चे समय पर भोजन नहीं करते, कभी खाना छोड़ देते हैं तो कभी जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं। यह असंतुलन शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है, जिससे वजन तेजी से बढ़ सकता है। पर्याप्त नींद न लेना भी इस समस्या को बढ़ाने में भूमिका निभाता है। डॉक्टरों का कहना है कि बचपन में बढ़ा हुआ मोटापा आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट से जुड़ी समस्याएं और मानसिक तनाव। इसलिए इसे समय रहते नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। बच्चों को रोजाना कम से कम एक घंटे की शारीरिक गतिविधि जैसे खेलकूद, दौड़ना या साइकिल चलाना जरूरी है। साथ ही घर का बना संतुलित और पौष्टिक भोजन देना चाहिए, जिसमें फल, सब्जियां और प्रोटीन शामिल हों। माता-पिता की भूमिका इस मामले में काफी अहम मानी जाती है। अगर घर का माहौल स्वस्थ आदतों वाला होगा तो बच्चे भी उसी को अपनाएंगे। बच्चों को शुरुआत से ही हेल्दी खाने की आदत डालना और स्क्रीन टाइम सीमित करना इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है।