राज्योत्सव में बच्चों को सिखाए गए कानूनी अधिकार, सुरक्षित बचपन अभियान के तहत दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

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कोंडागांव। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर विकास नगर स्टेडियम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विधिक जागरूकता स्टॉल लगाया गया। इस पहल के माध्यम से आम नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों, नि:शुल्क विधिक सहायता और शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष खिलावन राम रिगरी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से कानूनी संरक्षण एवं अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव गायत्री साय ने स्टॉल में पहुंची महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाव, महिला सुरक्षा, कानूनी अधिकारों और नि:शुल्क विधिक सहायता के बारे में जानकारी दी। वहीं बच्चों को बाल अधिकार, बाल संरक्षण, बाल विवाह की रोकथाम, बाल शोषण और लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के बारे में समझाया गया।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देश पर चलाए जा रहे सुरक्षित बचपन अभियान के तहत बच्चों को गुड टच-बैड टच, बाल श्रम, बाल विवाह, साइबर सुरक्षा और शोषण से बचाव जैसे विषयों की जानकारी दी गई। बच्चों को समझाया गया कि किसी भी तरह की परेशानी, अनुचित व्यवहार या शोषण का सामना करने पर डरने के बजाय अपने माता-पिता, शिक्षकों अथवा संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दें।

कार्यक्रम में नागरिकों को यह भी बताया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र लोगों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। किसी भी व्यक्ति को आर्थिक परेशानी के कारण न्याय पाने से वंचित नहीं रहना चाहिए। जरूरतमंद लोग अपनी कानूनी समस्याओं के समाधान और सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकते हैं।

इस आयोजन का उद्देश्य राज्योत्सव जैसे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के जरिए अधिक से अधिक लोगों तक कानूनी जानकारी पहुंचाना और उन्हें अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना रहा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से समाज के सभी वर्गों तक न्याय की पहुंच आसान बनाने और विधिक जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।