बस यात्रियों की बढ़ सकती है जेब पर मार, किराए में 1.75 रुपये प्रति किमी तक इजाफे की तैयारी; 22 सितंबर से संचालन बंद करने की चेतावनी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में आने वाले दिनों में बस से यात्रा करना महंगा हो सकता है। राज्य में यात्री बसों के किराए को प्रति किलोमीटर 1.75 रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है। डीजल सहित बस संचालन में इस्तेमाल होने वाली अन्य चीजों की लागत बढ़ने और बस ऑपरेटरों की लगातार मांग के बीच सरकार इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ रही है। प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद परिवहन विभाग इसकी अधिसूचना जारी करेगा।

जानकारी के मुताबिक परिवहन मंत्री केदार कश्यप और वित्त विभाग से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की बात सामने आई है। अब विधि विभाग की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है। मंजूरी के बाद किराया बढ़ोतरी की घोषणा और राजपत्र में प्रकाशन की प्रक्रिया होगी। प्रदेश में 12 हजार से ज्यादा यात्री बसें चलती हैं और इस कारोबार से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर एक लाख से अधिक लोग जुड़े हैं। वहीं, एक बस यूनियन ने मांग पर निर्णय नहीं होने की स्थिति में 22 सितंबर से बस संचालन रोकने का ऐलान किया है। यातायात महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली का कहना है कि वर्ष 2018 के बाद राज्य में बस किराए में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। उनके अनुसार पिछली सरकार के समय केवल 25 पैसे प्रति किलोमीटर बढ़ाने की अनुमति मिली थी। दूसरी ओर इस अवधि में डीजल का भाव करीब 92 रुपये से बढ़कर 110 रुपये प्रति लीटर हो गया।

इसके साथ इंजन ऑयल, ग्रीस, टायर-ट्यूब और अन्य रखरखाव सामग्री की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। ऑपरेटरों के मुताबिक बस चलाने की लागत बढ़ने के पीछे कई अन्य कारण भी हैं। इनमें एक सीट पर लगने वाले दोहरे कर, ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट के कथित गलत इस्तेमाल और जीपीएस उपकरणों की बढ़ी कीमत जैसी समस्याएं शामिल हैं। महासंघ का कहना है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों में भी ईंधन की कीमतों के असर को देखते हुए किराए में करीब दो रुपये प्रति किलोमीटर तक की बढ़ोतरी की गई है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ के बस संचालक भी किराया संशोधन की मांग कर रहे हैं।