बस्तर। बस्तर रेंज में पुलिस प्रशासन के नेतृत्व में बड़ा बदलाव हुआ है। 01 जुलाई 2026 को बद्रीनारायण मीणा ने बस्तर रेंज के नए पुलिस महानिरीक्षक (IG) के रूप में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। उन्होंने सुन्दरराज पट्टलिंगम का स्थान लिया, जिन्हें भारत सरकार की प्रतिनियुक्ति पर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) में पुलिस महानिरीक्षक के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय, जगदलपुर में आयोजित पदभार ग्रहण समारोह में बस्तर जिले के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित रेंज के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर अधिकारियों ने नए आईजी का स्वागत किया और उन्हें कार्यभार ग्रहण करने पर शुभकामनाएं दीं।
निवर्तमान आईजी सुन्दरराज पट्टलिंगम ने इस अवसर पर बस्तर में अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए शासन, पुलिस मुख्यालय, सुरक्षा बलों, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, मीडिया और आम नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बस्तर में कानून-व्यवस्था और विकास से जुड़े कार्य सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों से संभव हो सके हैं। उन्होंने विशेष रूप से वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों में शहीद हुए पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को याद किया। साथ ही उन्होंने “मिशन 2026” के प्रभावी क्रियान्वयन में सभी पक्षों के योगदान की सराहना की।
पट्टलिंगम ने कहा कि मिशन 2026 भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य बस्तर क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास स्थापित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अभियान आगे भी निरंतर गति से जारी रहेगा और क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा। नए आईजी बद्रीनारायण मीणा ने पदभार ग्रहण के बाद कहा कि उनकी प्राथमिकता बस्तर में शांति, सुरक्षा और समावेशी विकास को और मजबूत करना होगी। उन्होंने कहा कि सभी सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासनिक इकाइयों और स्थानीय समुदाय के साथ समन्वय बनाकर काम किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में किए गए प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए बस्तर क्षेत्र में जनविश्वास को मजबूत करना और विकास योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। समारोह के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि बस्तर रेंज में चल रहे सुरक्षा और विकास से जुड़े अभियानों को निरंतर जारी रखा जाएगा। नए नेतृत्व के साथ इन प्रयासों को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है। इस बदलाव को बस्तर रेंज में प्रशासनिक निरंतरता और रणनीतिक नेतृत्व परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है, जो क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
