निर्जला एकादशी पर ग्रहों का शुभ संयोग, बढ़ेगा लाभ का योग

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नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र और शनि को मित्र ग्रह बताया गया है Religion धर्म : 25 जून 2026 को साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी, यानी निर्जला एकादशी मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन निर्जला उपवास रखने और भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, धन-धान्य और सौभाग्य में वृद्धि होती है। श्रद्धालु इस दिन कठिन व्रत रखते हैं और पूरे दिन जल तक का त्याग करते हैं, जिससे इसे सबसे कठोर एकादशी व्रत भी कहा जाता है।

इस वर्ष निर्जला एकादशी को लेकर एक और विशेष ज्योतिषीय संयोग भी बन रहा है, जिसे नवपंचम राजयोग कहा जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब शनि और शुक्र एक-दूसरे से 120 डिग्री की दूरी पर आते हैं, तब नवपंचम राजयोग का निर्माण होता है। यह योग अत्यंत शुभ माना जाता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला होता है। शनि और शुक्र को ज्योतिष में मित्र ग्रह माना गया है। शनि जहां कर्म, अनुशासन और मेहनत का प्रतीक हैं, वहीं शुक्र सुख, समृद्धि, भोग-विलास और ऐश्वर्य के कारक ग्रह हैं। जब इन दोनों ग्रहों के बीच त्रिकोणीय संबंध यानी 120 डिग्री का योग बनता है, तो इसका प्रभाव बेहद शुभ माना जाता है। यह योग व्यक्ति के जीवन में आर्थिक उन्नति, करियर में प्रगति और रुके हुए कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है।

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 25 जून 2026 को शुक्र और शनि मिलकर नवपंचम राजयोग का निर्माण करेंगे। इस दुर्लभ संयोग का प्रभाव सभी 12 राशियों पर किसी न किसी रूप में देखने को मिलेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से भाग्यशाली साबित हो सकता है। इन राशियों के जीवन में अचानक आर्थिक लाभ के योग बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन, नई जिम्मेदारियां या बेहतर अवसर मिलने की संभावना है। वहीं व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय लाभकारी सिद्ध हो सकता है। लंबे समय से अटके हुए कार्यों में गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।

इसके साथ ही पारिवारिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। रिश्तों में सुधार, मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि जैसे संकेत भी इस अवधि में सामने आ सकते हैं। नवपंचम राजयोग का प्रभाव व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत करता है, जिससे सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलती है। धार्मिक दृष्टि से भी निर्जला एकादशी का दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ का कई गुना फल प्राप्त होता है। भक्त इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कुल मिलाकर, 25 जून 2026 की निर्जला एकादशी धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों ही दृष्टियों से बेहद खास रहने वाली है। नवपंचम राजयोग का यह दुर्लभ संयोग कुछ राशियों के लिए जीवन में बड़े बदलाव और सौभाग्य लेकर आने वाला माना जा रहा है, जिससे उनके अच्छे दिनों की शुरुआत हो सकती है।