अरुण पन्नालाल का दावा निराधार : सीएनआई

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  • मसीही नेतृत्व, अंतर्राष्ट्रीय दावे और वित्तीय अनियमितता की जांच की मांग

रायपुर। चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडियन ने अरुण पन्नालाल के दावों को निराधार बताते हुए उन पर मसीही नेतृत्व, अंतर्राष्ट्रीय दावे और वित्तीय अनियमिता के लगे आरोपों की जांच की मांग की है। डायोसिस ऑफ़ छत्तीसगढ़ (सी.एन.आई.) के सचिव नितिन लॉरेंस और बीशप द राइट रेव्ह सुषमा कुमार ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अरुण पन्नालाल द्वारा स्वयं को समुदाय का प्रतिनिधि बताकर दिए जा रहे, सार्वजनिक बयान ने सामाजिक हल्कों में हलचल पैदा कर दी है। चूंकि उन्हें किसी आधिकारिक चर्च द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि प्राप्त नहीं है । ऐसे में उनके दावे गंभीर हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि श्री पन्नालाल ने छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम” नामक संस्था के माध्यम से स्वयं को मसीही समाज का प्रतिनिधि घोषित कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर यूट्यूब चैनल पर विभिन्न विषयों पर बयानबाजी दे रहे हैं। इन गतिविधियों को लेकर समाज में भ्रम और संभावित तनाव की आशंका जताई गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की ऐसी बयानबाजी, जिससे विभिन्न धर्मों के बीच वैमनस्य या विवाद की स्थिति उत्पन्न हो, चर्च की शिक्षाओं एवं मूल्यों के विपरीत है। सी.एन.आई ने दोहराया कि वह सदैव शांति, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के पक्ष में रहा है।

श्री नितिन ने बताया कि डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने इस मामले में रायपुर पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत की है। शिकायत में संबंधित सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच, आवश्यक होने पर चैनल को प्रतिबंधित करने तथा विधि अनुसार अपराध दर्ज करने की मांग की है। साथ ही प्रशासन से यह भी आग्रह किया गया है कि धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की विभाजनकारी या राजनीतिक गतिविधि में संलिप्त पाए जाने पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। उन्होंने यहां भी बताया कि अरुण पन्नालाल द्वारा यह दावा किया गया कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को पत्र लिखकर भारत में प्रतिनिधिमंडल भेजने का अनुरोध किया है और कथित रूप से प्रतिनिधि यहां आया था। डायोसिस स्पष्ट करना चाहता है “मसीही समाज का अध्यक्ष बताकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व का दावा करना भ्रामक एवं गंभीर विषय है, जिससे समुदाय की छवि प्रभावित हो सकती है। नितिन लॉरेंस ने कहा कि “भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और उसके विषय में किसी भी प्रकार की अपुष्ट या तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत की गई जानकारी राष्ट्रीय हितों को प्रभावित कर सकती है। इस प्रकार के दावों की जांच होना आवश्यक है।