दुर्ग। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक अरुण वोरा ने छत्तीसगढ़ सरकार की वित्तीय नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार को समय रहते ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राजस्व, खर्च और बढ़ते वित्तीय दायित्वों के बीच संतुलन नहीं बनाया गया तो आने वाले वर्षों में प्रदेश को गंभीर आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
वोरा ने कहा कि सरकार के वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान ही वित्तीय स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े करते हैं। बजट में लगभग ₹2,000 करोड़ का राजस्व घाटा और ₹20,400 करोड़ का राजकोषीय घाटा अनुमानित है। ऐसे में सरकार को प्रदेश की वर्तमान वित्तीय स्थिति के साथ-साथ आने वाले वर्षों की वित्तीय रणनीति भी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बजट में कुल राजस्व प्राप्तियां लगभग ₹1.43 लाख करोड़, जबकि राजस्व व्यय करीब ₹1.45 लाख करोड़ अनुमानित है। यानी सरकार की नियमित आय की तुलना में नियमित खर्च अधिक रहने का अनुमान है। यह स्थिति बताती है कि सरकार को राजस्व बढ़ाने और गैर-जरूरी खर्चों पर नियंत्रण के लिए स्पष्ट रणनीति बनानी होगी।
वोरा ने कहा कि केवल बजट का आकार बढ़ना प्रदेश की आर्थिक मजबूती का प्रमाण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि सरकार अपनी आय के मुकाबले कितना खर्च कर रही है, कितना कर्ज ले रही है और भविष्य में उस कर्ज तथा अन्य वित्तीय दायित्वों का भुगतान किस तरह करेगी। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते वित्तीय दायित्वों का असर भविष्य में विकास योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, किसानों तथा स्थानीय निकायों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार को इस विषय को गंभीरता से लेते हुए दीर्घकालीन वित्तीय रोडमैप जनता के सामने रखना चाहिए।
अरुण वोरा ने कहा, “आर्थिक संकट अचानक पैदा नहीं होता। उसके संकेत पहले से दिखाई देने लगते हैं। सरकार को आज ही राजस्व बढ़ाने, अनावश्यक खर्च नियंत्रित करने और कर्ज के बोझ को संतुलित करने की नीति बनानी होगी। यदि समय रहते वित्तीय अनुशासन नहीं अपनाया गया तो आने वाले समय में इसका सीधा असर प्रदेश की जनता पर पड़ सकता है।” उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश की वास्तविक वित्तीय स्थिति को लेकर श्वेतपत्र जारी करना चाहिए, जिसमें कुल कर्ज, ब्याज भुगतान, राजस्व प्राप्तियां, राजस्व व्यय, लंबित वित्तीय दायित्वों और आने वाले वर्षों में होने वाले संभावित खर्च का स्पष्ट विवरण दिया जाए।
वोरा ने कहा कि जनता को बड़े-बड़े बजट आंकड़ों के बजाय यह जानने का अधिकार है कि प्रदेश की आय कितनी है, खर्च कितना है, कर्ज कितना है और भविष्य की पीढ़ियों पर उसका कितना वित्तीय बोझ पड़ेगा। सरकार को इन सवालों का स्पष्ट और पारदर्शी जवाब देना चाहिए।
