बिलासपुर। जिले के कोटा जनपद क्षेत्र अंतर्गत नवागांव (सलका) स्थित सहकारी विपणन संस्था के उपकेंद्र (राशन दुकान) में राशन वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। जनपद पंचायत सदस्य धर्मेंद्र देवांगन ने इस मामले में कलेक्टर, एसडीएम और खाद्य विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पिछले छह माह से पात्र हितग्राहियों को पूरा राशन नहीं दिया जा रहा है और बड़ी मात्रा में खाद्यान्न की हेराफेरी की गई है।
ज्ञापन के अनुसार, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाला राशन निर्धारित मात्रा में हितग्राहियों तक नहीं पहुंच रहा है। आरोप है कि जुलाई माह में पात्र परिवारों को केवल 20 प्रतिशत राशन वितरित किया गया, जबकि शेष 80 प्रतिशत राशन का वितरण नहीं किया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे बड़ी संख्या में गरीब और जरूरतमंद परिवार सरकारी योजना के लाभ से वंचित रह गए। जनपद सदस्य धर्मेंद्र देवांगन ने आरोप लगाया है कि पिछले लगभग छह महीनों के दौरान करीब 300 क्विंटल राशन की हेराफेरी की गई है। उनका कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो राशन वितरण में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण का मिलान कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। मामले को लेकर खाद्य विभाग की ओर से भी प्रारंभिक प्रतिक्रिया सामने आई है। फूड इंस्पेक्टर आशीष दीवान ने बताया कि उन्हें शुक्रवार को ही राशन वितरण में गड़बड़ी की जानकारी मिली है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले सुराज शिविर या समाधान शिविर जैसे किसी भी मंच पर इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। अब शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जनपद सदस्य ने अपने ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उन्होंने पिछले छह माह के राशन वितरण का पूरा रिकॉर्ड जांचने, सभी पात्र हितग्राहियों को बकाया राशन तत्काल उपलब्ध कराने तथा यदि गबन या हेराफेरी की पुष्टि होती है तो संबंधित संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही खाद्य विभाग के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय पर निगरानी और निरीक्षण किया जाता तो इतनी बड़ी अनियमितता की स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि निगरानी व्यवस्था में लापरवाही के कारण हितग्राहियों को उनका अधिकार नहीं मिल पाया। इसलिए पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। कलेक्टर और अन्य अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में अली बाबा कश्यप, मनोज मरावी (जनपद सदस्य), सचिन साहू और नेतु यादव भी शामिल रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की कि जांच जल्द पूरी कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में इस तरह की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल प्रशासन ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि की है और खाद्य विभाग ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि राशन वितरण में वास्तव में अनियमितता हुई है या नहीं। वहीं स्थानीय हितग्राही प्रशासन से उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें उनका बकाया राशन जल्द उपलब्ध कराया जाएगा और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
