वारंगल। तेलंगाना के वारंगल जिले के मल्लूर गांव की पहाड़ी पर स्थित हेमाचला लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर अपनी रहस्यमयी मान्यताओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। समुद्र तल से लगभग 1500 फीट ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर करीब 4000 साल पुराना माना जाता है और भगवान नरसिंह को समर्पित है। मंदिर में भगवान नरसिंह की लगभग 10 फीट ऊंची स्वयंभू मूर्ति स्थापित है। श्रद्धालुओं का मानना है कि, यह मूर्ति सामान्य पत्थर की नहीं है, बल्कि इसमें जीवंतता के संकेत मिलते हैं। कहा जाता है कि, मूर्ति को छूने पर यह मानव त्वचा जैसी अनुभूति देती है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मूर्ति पर फूल रखने और दबाने पर वह भीतर चला जाता है, जबकि अधिक दबाव देने पर उससे लाल रंग जैसा द्रव निकलता है, जिसे भक्त “दिव्य संकेत” मानते हैं। मूर्ति के नाभि भाग से भी एक तरल पदार्थ लगातार निकलता रहता है, जिसे रोकने के लिए चंदन का लेप लगाया जाता है। भक्तों का यह भी विश्वास है कि, मंदिर में पहुंचने पर मूर्ति के पास सांस लेने जैसी अनुभूति होती है।
मंदिर परिसर में बहने वाली जलधारा को भगवान के चरणों से उत्पन्न माना जाता है, जिसे “चिंतामणि जलपथम” कहा जाता है और इसे पवित्र व औषधीय गुणों वाला माना जाता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 150 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु सुख-समृद्धि, संतान सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति की आस्था लेकर आते हैं। मंदिर सीमित समय के लिए दर्शन हेतु खुलता है, क्योंकि मान्यता है कि भगवान नरसिंह का वास पूरे क्षेत्र में माना जाता है।
