मई में भक्ति का महापर्व: व्रत-त्योहारों का सिलसिला, सही तिथि पर पूजा से मिलेगा कई गुना फल

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मई महीने में सनातन धर्म के प्रेमियों के लिए भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति का अद्भुत संगम होने वाला है. इस माह वैशाख और ज्येष्ठ के पावन महीनों के बीच कई बड़े त्योहार, जयंती और विशेष तिथियां पड़ रही हैं, जिनका शास्त्रों में बड़ा महत्व है. एकादशी, अमावस्या और पूर्णिमा जैसे पवित्र दिनों पर पूजा-अर्चना, पवित्र स्नान और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. गंगा दशहरा, बुद्ध पूर्णिमा और पद्मिनी एकादशी जैसी महत्वपूर्ण तिथियों के कारण यह पूरा महीना साधना और पुण्य संचित करने का एक बेहतरीन मौका है।

मान्यता है कि, इस दौरान किए गए शुभ कार्यों का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक बढ़ जाता है. भगवान विष्णु की कृपा के लिए एकादशी, आत्मज्ञान के लिए बुद्ध पूर्णिमा और मां गंगा के अवतरण के पर्व गंगा दशहरा पर दान-पुण्य करने से अक्षय फल मिलता है. इसलिए अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा और नियमों का पालन कर इस पवित्र समय का लाभ उठाएं।

1 मई, शुक्रवार-वैशाख बुद्ध पूर्णिमा:
इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण माना जाता है. साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है।

3 मई, रविवार-नारद जयंती:
देवर्षि नारद का प्राकट्य दिवस पर कई कार्यक्रम होंगे. उन्हें ब्रह्मा जी का मानस पुत्र और पहला पत्रकार कहा जाता है. जिनकी भक्ति और ज्ञान का विशेष महत्व है।

13 मई, बुधवार-अपरा एकादशी:
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है. 24 में से एक इस एकादशी का व्रत को रखने से पापों का नाश और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

14 मई, गुरुवार-गुरु प्रदोष व्रत:
त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव की पूजा का विधान है. गुरुवार को पड़ने से यह गुरु प्रदोष कहलाता है, जो सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति देता है।

16 मई, शनिवार-शनि जयंती और वट सावित्री व्रत:
शनिदेव के जन्मोत्सव के साथ वट सावित्री व्रत का संयोग हैं. इस दिन पूजा और व्रत से शनिदोष शांति और पति की दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।

17 मई, रविवार-ज्येष्ठ अधिकमास प्रारंभ:
इस दिन से पुरुषोत्तम मास की शुरुआत होने वाली है. इस दौरान एक माह तक मांगलिक कार्य पर ब्रेक लगेगा. लेकिन दान, जप, तप और भक्ति करना अत्यंत शुभ होता है।

25 मई, सोमवार-गंगा दशहरा:
मां गंगा के धरती पर अवतरण का दिन विशेष होता है. इस दिन स्नान और पूजा करने से पापों का नाश और जीवन में शुद्धता व पुण्य की प्राप्ति होती है।

26 मई, मंगलवार-पद्मिनी एकादशी:
पुरुषोत्तम मास की विशेष एकादशी खास होती है. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

28 मई, गुरुवार-गुरु प्रदोष व्रत:
शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर महादवे की पूजा का विशेष महत्व होता है. गुरुवार के कारण यह गुरु प्रदोष बनता है, जो हर प्रकार के कष्ट दूर करने वाला माना गया है।