नई दिल्ली। 40 से 50 साल की उम्र वाली महिलाओं के लिए यह के अहम समय होता है। हर महिला के जीवन में कई चरण आते हैं, जिनमें शारीरिक और मानसिक बदलाव स्वाभाविक हैं। जन्म, बचपन, किशोरावस्था और प्रजनन आयु के बाद एक ऐसा समय भी आता है, जब महिला का शरीर पुराने तरीके से काम करना बंद कर देता है। ये बदलाव केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी महसूस किए जा सकते हैं। आपको बता दें की महिलाओं के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि उनके शरीर में कौन-कौन से बदलाव हो रहे हैं और इसके लिए उन्हें कैसे तैयारी करनी चाहिए। मेनोपॉज भी इसी प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे समझना हर महिला के लिए जरूरी है ताकि वे समय रहते अपनी सेहत और जीवनशैली में जरूरी बदलाव कर सकें।
मेनोपॉज महिला के जीवन का वह चरण है जब उसके अंडाशय में अंडाणु का उत्पादन बंद हो जाता है और माहवारी यानी कि पीरियड पूरी तरह रुक जाते हैं। आम तौर पर ये 45 से 55 साल की उम्र के बीच होता है, लेकिन कभी-कभी यह जल्दी या देर से भी शुरू हो सकता है। मेनोपॉज को पूरा होने के बाद महिला की प्रजनन क्षमता समाप्त हो जाती है।
1. माहवारी में बदलाव : मेनोपॉज के शुरुआती चरण में माहवारी का चक्र अनियमित हो जाता है। कभी अधिक लंबा तो कभी छोटा हो सकता है। धीरे-धीरे यह पूरी तरह रुक जाता है। जिसके कुछ उपचार है, जैसे – हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) डॉक्टर की सलाह से। पत्तेदार सब्जियां, सोया और फ़्लैक्ससीड का सेवन करें। नियमित व्यायाम और तनाव कम करने की तकनीकें आजमाएं।
2. तेज पसीना आना : अचानक गर्मी का एहसास और पसीना आना भी मेनोपॉज का एक अहम लक्षण है। यह अक्सर रात को होता है। जिसके कुछ उपचार है, जैसे – हल्के कपड़े पहनें और कमरे में वेंटिलेशन रखें। कैफीन और मसालेदार भोजन कम करें। योग, ध्यान और गहरी साँस लेने की तकनीक अपनाएं।
3. नींद में परेशानी : अनिद्रा या बार-बार जागना भी इसका लक्षण है। ऐसा इसलिए क्योंकि हार्मोनल बदलाव सीधा नींद पर असर डालते हैं। जिसके कुछ उपचार है, जैसे – सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें। नियमित समय पर सोने और उठने की आदत डालें। गर्म दूध या कैमोमाइल टी पीने से आराम मिलता है।
