नई दिल्ली। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक एक्सरसाइज़ का तरीका है जिसका इस्तेमाल ताकत, सहनशक्ति और मसल्स बनाने के लिए किया जाता है। यह एक्सरसाइज़ वज़न, रेजिस्टेंस बैंड या दूसरे टूल्स की मदद से मसल्स पर प्रेशर बढ़ाकर की जाती है। हालांकि, बहुत से लोगों को शक होता है कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने के लिए उन्हें जिम जाने की ज़रूरत है या नहीं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने के लिए जिम जाना ज़रूरी नहीं है। डॉक्टर भी शरीर को स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के फ़ायदों के बारे में बताते हैं। कई सालों से, हर कोई महिलाओं को पतली दिखने और वज़न कम करने के लिए कहता आ रहा है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह सेहत का सही इंडिकेटर नहीं है, और मसल्स बनाना महिलाओं के लिए सबसे ज़रूरी सेहत सुधारों में से एक है।
वहीं स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाती है और शरीर एनर्जी का ज़्यादा अच्छे से इस्तेमाल करता है। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को भी बेहतर बनाती है और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करती है। इसी तरह, मसल्स हड्डियों की उस ताकत की रक्षा करती हैं जो महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ कम होती जाती है। वे हार्मोनल बैलेंस को बेहतर बनाने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। इसके साथ ही, डॉक्टर बताते हैं कि जोड़ों की सेहत बेहतर होती है और चोट लगने का खतरा कम होता है। वज़न उठाने का मतलब सिर्फ़ बाहर से मज़बूत दिखना नहीं है। डॉक्टर्स का कहना है कि शरीर को मेटाबॉलिक रूप से एक्टिव, हॉर्मोनल रूप से बैलेंस्ड और फिजिकली मजबूत बनाना ज़रूरी है। महिलाएं घर का काम करती हैं, ज़िम्मेदारियां उठाती हैं और सबका मूड अच्छा करती हैं। अब उनके लिए वेट उठाने का भी समय आ गया है और डॉक्टर्स कह रहे हैं कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सिर्फ़ जिम तक ही सीमित नहीं है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के फ़ायदे हैं जैसे मेटाबॉलिज़्म बढ़ाना, हॉर्मोनल बैलेंस सुधारना, हड्डियां मज़बूत करना, पोस्चर ठीक करना और सेल्फ़-कॉन्फिडेंस बढ़ाना। मज़बूत महिलाएं सिर्फ़ वो नहीं होतीं जो दुनिया को संभाले, वे इसका रूप बदल सकती हैं। डॉक्टर्स का सुझाव है कि सिर्फ़ बाहर से ही नहीं, बल्कि अंदर से भी मज़बूत बनना ज़रूरी है।
