धान खरीदी पूरी होने के बाद ही मिलर्स को मिलेगा कस्टम मिलिंग के लिए धान, सरकार ने जारी किए नए निर्देश

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रायपुर। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी और कस्टम मिलिंग को लेकर छत्तीसगढ़ शासन ने नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत धान खरीदी की अवधि पूरी होने से पहले उपार्जन और संग्रहण केंद्रों से मिलर्स को कस्टम मिलिंग के लिए धान का उठाव नहीं करने दिया जाएगा। खरीदी समाप्त होने के बाद ही मिलर्स को धान उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य चावल की रिसाइक्लिंग पर रोक लगाने के साथ धान के भंडारण और परिवहन प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।

जारी निर्देशों के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में नागरिक आपूर्ति निगम के पास 50 प्रतिशत तक चावल जमा करने वाले मिलर्स के साथ वर्ष 2026-27 के लिए कस्टम मिलिंग अनुबंध किया जाएगा। हालांकि, नए सीजन में मिलर्स को धान का डिलीवरी ऑर्डर खरीदी अवधि समाप्त होने के बाद ही जारी किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए चावल की आवश्यकता होने पर नागरिक आपूर्ति निगम के अनुरोध पर विपणन संघ निर्धारित अवधि से पहले भी धान उपलब्ध करा सकेगा।

शासन ने खरीदी केंद्रों से धान के उठाव में दोहरे परिवहन खर्च को रोकने के लिए अधिक से अधिक धान सीधे मिलर्स को उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। नई बारदाना नीति और धान के शीघ्र निराकरण को ध्यान में रखते हुए अधिक मिलिंग क्षमता वाले जिलों के मिलर्स को कम क्षमता वाले जिलों के धान के निराकरण से भी जोड़ा जाएगा। जरूरत के अनुसार इस व्यवस्था में बदलाव किया जा सकेगा। धान का वितरण सहकारी समितियों के खर्च पर रैंडम वजन कराने के बाद किया जाएगा। परिवहनकर्ता की मांग पर शत-प्रतिशत धान का वजन कराना भी अनिवार्य होगा।

सीमावर्ती राज्यों से धान लाकर छत्तीसगढ़ के खरीदी केंद्रों में समर्थन मूल्य पर बेचने की आशंका को देखते हुए निगरानी व्यवस्था भी सख्त की गई है। निर्देश के मुताबिक 30 अप्रैल तक दूसरे राज्यों से धान आयात करने के लिए संचालक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण की अनुमति जरूरी होगी। हालांकि, 3300 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक लागत वाली सुपर फाइन किस्म के धान के आयात के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन इसकी सूचना जिला खाद्य अधिकारी या खाद्य नियंत्रक को देनी होगी।

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 5 नवंबर से 5 जनवरी तक की जाएगी। वहीं, किसानों के लिए धान बिक्री की अधिकतम सीमा 27 क्विंटल प्रति एकड़ लिकिंग सहित निर्धारित की गई है। शासन का कहना है कि नई व्यवस्था से धान खरीदी में पारदर्शिता बढ़ाने, चावल की रिसाइक्लिंग रोकने और उपार्जित धान का समय पर निराकरण करने में मदद मिलेगी।