विधानसभा में SIR और धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर तीखी नोकझोंक , विपक्ष का बहिष्कार

Follow Us

रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज का दिन भारी हंगामे और तीखी राजनीतिक टकराव के नाम रहा। शून्यकाल से शुरू हुआ विवाद धर्म स्वातंत्र्य विधेयक तक पहुंचा, जहां सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए।

सबसे पहले शून्यकाल में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने SIR (मतदाता सूची पुनरीक्षण) में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए स्थगन प्रस्ताव लाया। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में 19 लाख 13 हजार से ज्यादा लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए, जिससे वे “लापता नागरिक” बन गए हैं। इस पर चर्चा की मांग की गई।

हालांकि भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इसे राज्यहित से असंबंधित बताते हुए सदन में उठाने का विरोध किया और कहा कि यह मुद्दा रिकॉर्ड में भी शामिल नहीं होना चाहिए। वहीं विधायक धर्मजीत सिंह ने विपक्ष पर मुद्दाविहीन होने का आरोप लगाया।

इस दौरान कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि एक पार्टी के लोगों ने अन्य बूथों के मतदाताओं के नाम कटवाए हैं, जिससे सदन में तीखी नोकझोंक हुई। अंततः आसंदी ने इसे भारत निर्वाचन आयोग का विषय बताते हुए स्थगन प्रस्ताव खारिज कर दिया। इसके विरोध में विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए वॉकआउट कर दिया।

इसके बाद सदन में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 पेश किया गया, जिसे डिप्टी सीएम व गृहमंत्री विजय शर्मा ने प्रस्तुत किया।

विधेयक पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. महंत ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इसी तरह के कानूनों को लेकर 11 राज्यों के मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए इस पर अभी चर्चा नहीं होनी चाहिए और इसे प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए।

इस पर अजय चंद्राकर ने पलटवार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहीं भी नए कानून बनाने पर रोक नहीं लगाई है और यह विधेयक पूरी तरह विधिसम्मत है। गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी स्पष्ट किया कि किसी प्रकार का कोई स्टे नहीं है, राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार है और इस विधेयक पर व्यापक फीडबैक लिया गया है।

आसंदी ने विपक्ष की आपत्ति खारिज कर विधेयक को पेश करने की अनुमति दे दी। इससे नाराज विपक्ष ने पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया और सदन से बाहर नारेबाजी करते हुए निकल गया।

वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर “पलायन” का आरोप लगाते हुए कहा कि गंभीर मुद्दों पर चर्चा से बचना उनकी रणनीति बन गई है। सत्ता पक्ष के विधायकों ने विपक्ष पर धर्मांतरण के समर्थन तक के आरोप लगाए, जिससे सदन का माहौल और अधिक गरमा गया।

आज का विधानसभा सत्र आरोप-प्रत्यारोप, हंगामे और बहिष्कार के बीच पूरी तरह राजनीतिक टकराव होता है।