पुतिन से तेल सौदे को लेकर ट्रंप पर दबाव, रूस पर प्रतिबंध के लिए संसद में आएगा विधेयक

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मॉस्को/वाशिंगटन। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से तेल का सौदा करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले ने अमेरिका की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। ट्रंप के इस कदम के खिलाफ अब उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के सांसद भी खड़े होने लगे हैं। रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने साफ कर दिया है कि वह रूस से तेल खरीदने पर रोक लगाने के लिए एक नया विधेयक लाएंगे। खास बात यह है कि इस मुहिम को डेमोक्रेटिक सांसदों के साथ-साथ रिपब्लिकन नेताओं का भी समर्थन मिल रहा है। हालांकि, प्रतिनिधि सभा का मौजूदा कार्यकाल जनवरी में खत्म होने वाला है, इसलिए इस विधेयक के कानून बनने की राह आसान नहीं दिख रही।

ट्रंप के फैसले के खिलाफ बिल लाने की तैयारी:
रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने कहा है कि वह रूस से तेल की किसी भी तरह की खरीद पर रोक लगाने के लिए एक ऐसा विधेयक पेश करेंगे, जिसे दोनों पार्टियों का समर्थन हासिल होगा। फिट्जपैट्रिक कांग्रेस के यूक्रेन कॉकस के सह-अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि इस विधेयक का नाम ‘रोनाल्ड रीगन पीस थ्रू स्ट्रेंथ एक्ट’ रखा जाएगा।फिट्जपैट्रिक के मुताबिक, वह इस विधेयक को सदन के पटल पर लाने के लिए डिस्चार्ज प्रक्रिया का इस्तेमाल करेंगे। इस प्रक्रिया के तहत पर्याप्त सांसदों के समर्थन से किसी विधेयक को संबंधित समिति की मंजूरी के बिना भी सदन में चर्चा और मतदान के लिए लाया जा सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह विधेयक भारी बहुमत से पारित होगा।

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रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन भी आए साथ:
फिट्जपैट्रिक की इस पहल को रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन का भी समर्थन मिला है। नेब्रास्का से सांसद बेकन ने कहा कि वह इस विधेयक के शुरुआती सह-प्रायोजकों में शामिल होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कांग्रेस को इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करना चाहिए और मजबूती से खड़ा होना चाहिए। बेकन ने यह भी साफ किया है कि वह तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव में दोबारा अपनी किस्मत नहीं आजमा रहे हैं। ऐसे में ट्रंप के रूस से तेल खरीदने के फैसले के खिलाफ रिपब्लिकन खेमे से उठ रही आवाज को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

पुतिन से बातचीत के बाद ट्रंप ने किया था बड़ा एलान:
शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत के बाद ट्रंप ने एलान किया था कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजार को तुरंत तीन लाख टन डीजल की आपूर्ति करेगा। इस समझौते की खबर सामने आते ही अमेरिकी संसद में हलचल मच गई। इस सौदे ने इसलिए भी विवाद खड़ा कर दिया, क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस ने पिछले महीने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़ा एक अहम कानून भारी बहुमत से पारित किया था। इस कानून के तहत ट्रंप को रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाने और तेल-गैस कारोबार से जुड़े उसके पांच प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया था। इन देशों में भारत और चीन भी शामिल हैं।

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‘रूसी तेल खरीदने पर पहले ही लग चुकी है रोक’:
अमेरिकी सीनेटर जीन शाहीन ने ट्रंप प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए हैं। सीनेट की विदेश संबंध समिति में विपक्ष की वरिष्ठ सदस्य शाहीन ने कहा कि अमेरिका ने 2022 में ही रूसी ऊर्जा के आयात पर रोक लगा दी थी। ऐसे में राष्ट्रपति ट्रंप कानून को नजरअंदाज कर पुतिन से डीजल खरीदने का फैसला नहीं कर सकते। शाहीन के मुताबिक, कानून में इस तरह के मामले में कांग्रेस से सलाह लेने और औपचारिक समीक्षा प्रक्रिया पूरी करने का प्रावधान है। उन्हें आशंका है कि ट्रंप प्रशासन ने इन दोनों प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया है। उनका कहना है कि इस मामले में यह स्पष्ट होना चाहिए कि सरकार ने मौजूदा कानून का पालन किया है या नहीं।

सीनेटर ब्लूमेंथल ने सौदे को बताया शर्मनाक:
रूस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े कानून के सह-लेखक अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भी ट्रंप के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने पुतिन के साथ हुए इस समझौते को शर्मिंदगी भरा कदम बताया। ब्लूमेंथल और दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने मिलकर रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से संबंधित विधेयक तैयार किया था। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों ने 16 सितंबर को इसे भारी बहुमत से पारित किया था। इसके दो दिन बाद, 18 सितंबर को ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया था।

भारत और चीन को भी दे चुके हैं चेतावनी:
रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून के पारित होने के बाद ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को भी कड़ा संदेश दिया था। उन्होंने दोनों देशों से अपना रवैया बदलने और रूस के बजाय दूसरे देशों से तेल खरीदने को कहा था। अब ट्रंप के रूस के साथ तेल का सौदा करने से अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। एक तरफ रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर सख्त रुख अपनाने की मांग हो रही है, तो दूसरी तरफ ईंधन की कीमतों को काबू में रखने की जरूरत भी चर्चा में है।

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‘रूसी तेल से पुतिन की युद्ध मशीन को मिलेगी ताकत’:
कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक सांसद डेव मिन ने भी ट्रंप के फैसले पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अगर ट्रंप रूस के साथ लगातार ऐसे अवैध तेल समझौते करते रहे, तो हो सकता है कि अमेरिका को खुद पर ही प्रतिबंध लगाने की नौबत आ जाए। वहीं, टेक्सास से रिपब्लिकन सांसद माइकल मैककॉल ने कहा कि वह डीजल की कीमतें कम करने की जरूरत को समझते हैं, लेकिन रूसी तेल पर प्रतिबंधों में ढील देने से उन्हें चिंता है। उनके मुताबिक, इससे रूस के राष्ट्रपति पुतिन को युद्ध जारी रखने के लिए आर्थिक मदद मिल सकती है और रूस की ओर से हिंसा तथा तबाही बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

आगे क्या होगा?:
ट्रंप के रूस से तेल खरीदने के फैसले ने अमेरिकी संसद में उनकी नीतियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों का एक साथ विरोध करना खास मायने रखता है। हालांकि, प्रतिनिधि सभा का मौजूदा कार्यकाल जनवरी में खत्म हो रहा है और बीच में तीन नवंबर को मध्यावधि चुनाव भी होने हैं। ऐसे में नए विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए सांसदों के पास सीमित समय है। फिट्जपैट्रिक को उम्मीद है कि विधेयक को भारी समर्थन मिलेगा, लेकिन इसे पारित कराने और आगे की विधायी प्रक्रिया पूरी करने में समय की कमी बड़ी चुनौती बन सकती है।