रुपये को स्थिर रखने के लिए बदले विदेशी मुद्रा कारोबार के नियम, तेल कंपनियों को डॉलर मिलने का रास्ता साफ

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रुपये की गिरावट थामने के लिए तीन बड़े फैसले लिए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष सुविधा की घोषणा की गई है। विदेशी मुद्रा बाजार के नियम सख्त किए गए हैं। विदेशी मुद्रा डीलरों के लिए विदेशी मुद्रा जोखिम आरक्षित निधि की एक नई व्यवस्था भी शुरू की है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने शनिवार को इन उपायों का घोषण की। इससे अत्याधिक सट्टेबाजी पर अंकुश के साथ-साथ विदेशी मुद्रा लेन-देन में पारदर्शिता आएगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच रुपये में गिरावट का रुख जारी है। घरेलू मुद्रा शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.71 के स्तर पर बंद हुई थी। केंद्रीय बैंक की ओर से नामित इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम को अब रोजाना जरूरत के मुताबिक, डॉलर एक खास विंडो के जरिये मिलेगा। केंद्रीय बैंक चुनिंदा बैंकों के माध्यम से इन कंपनियों को डॉलर बेचेगा। यह सुविधा 12 अक्तूबर से शुरू होगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी।

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आरबीआई ने विदेशी मुद्रा नियम भी सख्त किए:
रिजर्व बैंक ने रुपये में उतार-चढ़ाव पर लगाम और बाजार में अनुशासन व पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार नियम भी सख्त कर दिए हैं। इससे विदेशी मुद्रा से जुड़े डेरिवेटिव सौदों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अब अधिकृत डीलर किसी भी यूजर को रद्द सौदों को दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं देंगे। हालांकि, रोलओवर की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी। बिना किसी वास्तविक लेन-देन या जोखिम के विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव में कारोबार करने की सीमा भी काफी घटा दी गई है। पहले यह सीमा 10 करोड़ डॉलर थी, जिसे अब घटाकर 50 लाख डॉलर कर दिया गया है। यही नियम मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर रुपये से जुड़े करेंसी डेरिवेटिव्स पर भी लागू होगा।

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